भोपाल. राज्य सरकार ने मनरेगा लोकपाल नियुक्ति के नियम बदल दिए हैं. नए नियम के मुताबिक मनरेगा लोकपाल नियुक्ति के लिए सिलेक्शन कमेटी की सिफारिश को अनिवार्य कर दिया गया है. अभी तक मनरेगा लोकपाल की नियुक्ति लोकायुक्त की अनुशंसा पर होता रहा है.

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने पहली बार केंद्र सरकार के मनरेगा ( महात्मा गांधी नेशनल रूरल एंप्लॉयमेंट गारंटी) एक्ट 2005 के तहत नए नियम बनाए हैं, जो आगामी 15 जनवरी के बाद पूरे प्रदेश में प्रभावशाली किए जाएंगे. प्रदेश में 17 जिलों में मनरेगा लोकपाल नियुक्त हैं. इनकी नियुक्ति केंद्र सरकार के मनरेगा नियमों के तहत लोकायुक्त की जनसंख्या पर की जा रही थी. चूंकि राज्य सरकार को इन लोकपाल की नियुक्ति के लिए अपने स्वयं के नियम बनाने थे.

16 साल बीत जाने के बाद भी राज्य सरकार नियम नहीं बना सकी. अब जाकर सरकार जागी और मनरेगा लोकपाल नियुक्ति के नियम बनाए. मनरेगा लोकपाल नियुक्ति के लिए चयन समिति का गठन किया जाएगा. इस सिलेक्शन कमेटी के अध्यक्ष अपर मुख्य सचिव होंगे. इसके अलावा केंद्रीय ग्रामीण मंत्रालय का प्रतिनिधि, केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त विषय विशेषज्ञ सदस्य होंगे. पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के प्रमुख सचिव अथवा सचिव समिति के संयोजक होंगे

2 साल के लिए होगी नियुक्ति
 नए नियम के अनुसार मनरेगा लोकपाल की नियुक्ति 2 साल के लिए की जाएगी. मनरेगा लोकपाल को प्रत्येक बैठक के लिए ₹1000 पारिश्रमिक दिया जाएगा. यह पारिश्रमिक एक माह में  20,000 से ज्यादा नहीं होगा. लोकपाल को मनरेगा में गड़बड़ी से संबंधित शिकायत की जाएगी. यदि लोकपाल फील्ड में जाकर जांच करना चाहता है तो उसे सरकारी वाहन की सुविधा दी जाएगी. यदि वह इस कार्य के लिए  स्वयं के वाहन का उपयोग करता है तो उसके व्यय की प्रतिपूर्ति की जाएगी.