अधिकारियों ने ऐसे की है गलतियां
कंपनी के मानव संसाधन विभाग और खरीदी विभाग के प्रमुख अधिकारियों ने टेंडर का ड्राफ्ट सभी सर्किलों को भेजा और टेंडर जारी किए गए। इसमें लिखा कि कर्मचारियों को वेतन पर 8.33 फीसद बोनस की राशि संबंधित ठेकेदारों को देनी पड़ेगी।
जब ठेकेदारों ने बोनस की राशि के साथ आउटसोर्स कर्मचारियों के बिल बनाकर भेजे तो बिजली कंपनी के एमडी ऑफिस से बोनस की राशि काटकर भुगतान कर दिया।
बोनस की राशि नहीं देने पर ठेकेदारों ने आपत्ति दर्ज कराई तो अधिकारियों ने टेंडर में लिखी शर्त दिखा दी।
आउटसोर्स कर्मचारी कुशल, अकुशल और अर्धकुशल श्रेणी में काम करते हैं जिन्हें सात से लेकर 11 हजार रुपये तक का वेतन मिलता है। जान जोखिम में डालने वाले इन कर्मचारियों को महीने में 700 से 1000 रुपये बोनस का भुगतान होता था लेकिन अप्रैल 2021 से नए ठेके हुए हैं तब से भुगतान रोक लिया गया है। कर्मचारी बहुत परेशान हैं।
उल्लेखनीय है कि मप्र मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के अधिकारियों ने 540 करोड़ रुपये के टेंडर में गड़बड़ी की है। आउटसोर्स से कराए जाने वाले कार्यों के लिए यह टेंडर तीन साल के लिए दिए हैं। ठेकेदारों ने टेंडर की शर्तों को आधार बनाकर 11 हजार कर्मचारियों के 2.56 करोड़ रुपये रोक लिए हैं। यह राशि बोनस की है, जो अप्रैल 2021 से नहीं दी जा रही है।
बिजली कंपनी के अधिकारी और ठेकेदारों के बीच ऐसे हुई सांठगांठ
टेंडर के समय बिजली कंपनी के अधिकारी और ठेकेदारों के बीच अलग-अलग शर्तें शामिल कर दी थी, उन्हीं के अनुरूप ठेकेदारों ने टेंडर में सांठगांठ हो गई और आपस में टेंडर बांट लिए गए। सूत्रों का दावा है कि रेट भर दिए थे और अनुबंध भी हो गया था। जब ठेकेदारों ने टेंडर शर्तों के शुरुआत से ही टेंडर की शर्तों को ठेकेदारों के अनुरूप बनाया गया, ताकि अनुरूप बिजली कंपनी में बिल लगाए तो बिजली कंपनी ने ठेकेदारों को उन्हें अधिक दाम न चुकाने पड़े। आउटसोर्स कंपनियों का अप्रैल 2021 से बोनस और पीएफ की राशि देने से मना कर दिया। कंपनी के अधिकारी नए सिरे से ठेका हुआ है। पूर्व में एक या दो कंपनियां ही काम करती थी। कहने लगे कि अनुबंध शर्तों के मुताबिक आउटसोर्स कंपनी के ठेकेदारों को अब मप्र मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी में 18 ठेका कंपनियां हैं, जिन्होंने अपने पास से बोनस और पीएफ की राशि देनी होगी। जिस पर ठेकेदार अड़ बिजली कंपनी को 11 हजार से अधिक कर्मचारी सप्लाई किए हैं। इसके गए। इनका कहना है कि जब मुख्य बिजली कंपनी ही राशि नहीं देगी, तो वे लिए ठेका कंपनियों से बिजली कंपनी ने अनुबंध किया है। अनुबंध करते अपने पास से भुगतान नहीं कर सकेंगे और यही विवाद अभी भी जारी है। समय बिजली कंपनी के खदीदी और मानव संसाधन विभाग के 11 हजार से अधिक आउटसोर्स कर्मचारियों को बोनस और पीएफ की अधिकारियों ने टेंडर शर्तों में छेड़छाड़ कर दी थी। अनुबंध के दस्तावेजों में राशि नहीं मिल रही है जो कि करोड़ों रुपये होती है।