डब्ल्यूसी आरएमएस के विवाद में उलझा रेलवे, प्रोविजनल समिति से बातचीत को राजी...
भोपाल: वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ डब्ल्यूसी आरएमएस के विवाद में रेलवे भी उलझता जा रहा है। पश्चिम मध्य रेलवे ने डब्ल्यूसी आरएमएस की प्रोविजनल समिति को बातचीत के लिए उचित माना है।
इस समिति को 27 अक्टूबर को रजिस्ट्रार सेंट्रल ट्रेड यूनियन ने संशोधित किया था। रेलवे ने अभी मान्यता नहीं दी है केवल बातचीत के लिए माना है। इस समिति में अशोक पांडे गुट के लोगों का नाम है जबकि आरपी भटनागर गुट का नाम नहीं हैं।
रेलवे ने इस विवाद में ऐसे समय में एंट्री की है जब डब्ल्यूसी आरएमएस का मुख्य कार्यालय विवाद के चलते पुलिस ने सील कर दिया था। मामले को लेकर कोर्ट में प्रक्रिया चल रही है। ऐसे समय में रेलवे ने एक गुट को जिस प्रोविजनल समिति के रूप में सही ठहराया है उसको लेकर विवाद और आगे बढ़ना तय है।
पश्चिम मध्य रेलवे में डब्ल्यूसी आरएमएस एक मान्यता प्राप्त रेल यूनियन है जो सालों पुरानी है। जिसमें दो महीने से विवाद चल रहे थे। विवाद दो गुटों के बीच था जिसमें पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज करने से लेकर मामला कोर्ट तक पहुंच गया है।
प्रोविजनल समिति:
रेलवे द्वारा जारी पत्र के साथ जो चिट्ठी जारी की है उसमें समिति को प्रोविजनल बताया है। स्थाई समिति नहीं है। सूत्रों का दावा है कि यह विवाद अभी खत्म नहीं होगा, आगे बढ़ेगा।
बेकाम पड़े कबाड़ को रेलवे ने बेचा, यात्रियों के लिए खरीदे जाएंगे कोच..
रेलवे ने बेकाम पड़े कोचों को बेच दिया है। नए एलएचबी कोच खरीदे जाएंगे जो अधिक मजबूत होंगे और तेज गति से चल सकेंगे। रेलवे ने बीते एक साल में बेकाम कोच व अन्य सामग्री को बेचकर 34.76 करोड़ रुपये कमाए हैं। भोपाल रेल मंडल के अधिकारियों ने बताया कि मंडल के स्टेशनों, गोदामों, रेलवे ट्रैक के किनारे, कोचिंग डिपो और कार्यालयों में वर्षों से पुराने उपयोगहीन उपकरण, उनके पुर्जे, खराब लोहा, कोच व इंजनों से निकलने वाली सामग्री, दफ्तरों निकली रद्दी रखी थी।
इनमें कोच इंजन व ट्रैक से निकलने वाला कबाड़ बढ़ी मात्रा में था, जिसे अब बेच दिया गया है। उधर, कबाड़ बेचने से मंडल के दफ्तर, गोदाम व दफ्तर खाली हो गए हैं। अब इनका उपयोग हो सकेगा।