कांग्रेस विधायक सचिन बिरला ने पार्टी को किया अलविदा, सीएम की उपस्थिति में हुए भाजपा में शामिल

भोपाल. दल बदल के चलते सत्ता से हाथ धो बैठी कांग्रेस को रविवार को एक और बड़ा झटका लग गया. खंडवा संसदीय क्षेत्र के बड़वाह से कांग्रेस विधायक सचिन बिरला ने बीजेपी का दामन थाम लिया हैं. ठीक उपचुनाव से पहले एक और कांग्रेसी विधायक सचिन बिरला ने बीजेपी जॉइन कर ली. रविवार को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की उपस्थिति में भेड़िया की चुनावी सभा में बीजेपी में शामिल हुए. बिरला को बीजेपी में लाने का श्रेय कृषि मंत्री कमल पटेल और मांधाता विधायक नारायण पटेल को दिया जा रहा है. कांग्रेस का आरोप है कि सचिन बिरला भी सिंधिया समर्थक विधायकों की तरह बिक गए हैं.
 
राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर अंग्रेज विधायक सचिन बिरला के भाजपा में जाने की खबर शनिवार की देर रात्रि से सुर्खियों में चल रही थी. साल भर के भीतर ऐसा दूसरी बार राजनीतिक गलियारों में सचिन बिरला के भाजपा में शामिल होने की खबर सुर्खियों में है. सूत्रों ने बताया कि बाबा विधायक सचिन बिरला प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ और उनके किचन केबिनेट के सदस्यों द्वारा लगातार उपेक्षा करने से दुखी थे. विधायक बिरला के भाजपा में शामिल होने की खबरों को तब और बल मिल गया जब उन्होंने सार्वजनिक मंच पर प्रदेश के कृषि मंत्री कमल पटेल की तारीफ करते नजर आए थे. दरअसल कांग्रेस सरकार में विधायक के विधानसभा क्षेत्र की उपेक्षा हुई थी जिसके कारण वे दुखी थे. सचिन बिरला से बात करना चाही पर फोन रिसीव नहीं किया. हालांकि कांग्रेस ने उन्हें जोबट विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी थी. विधायक सचिन बिरला पूर्व मुख्यमंत्री प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के किचन केबिनेट के सदस्य रवि जोशी के समर्थक है. पिछले वर्ष दिसंबर में भी सचिन बिरला के बीजेपी में जाने की खबर सुर्खियों में थी. तब विधायक बिरला ने भाजपा में जाने की खबरों का खंडन किया था. कांग्रेस विधायक सचिन बिरला सीट  विधानसभा सीट बड़वाह, खंडवा संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आता है. खंडवा संसदीय क्षेत्र से टिकट के लिए भी बिरला का नाम खबरों की सुर्खियों में था.
 
 *कमलनाथ के नाम पर रिकार्ड दर्ज*
 
 प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के नाम रिकॉर्ड दर्ज 
 भोपाल. संभवतः कांग्रेस की राजनीति में पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ इकलौते ऐसे नेता हैं, जिनके नेतृत्व में पार्टी के 2 दर्जन से अधिक विधायक भाजपा में चले गए. इसी के चलते डेढ़ दशक बाद सत्ता में लौटी कांग्रेस की सरकार भी चली गई. पूर्व केंद्रीय मंत्री कमलनाथ ने जब से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष की कुर्सी संभाली है, तभी से उनकी कार्यशैली पर सवाल उठने लगे थे. दरअसल कमलनाथ कॉर्पोरेट कल्चर में संगठन संचालित करना कर रहे हैं. विपक्ष में रहते हुए भी कांग्रेस पदाधिकारियों, विधायकों और कार्यकर्ताओं को उनसे भेंट करने के लिए कई चेकपोस्ट होकर गुजरना पड़ता है. यही वजह है कि एक-एक करके कांग्रेस के दो दर्जन विधायक पार्टी छोड़कर बीजेपी में चले गए. कॉन्ग्रेस प्रदेश में कमजोर हुई पर प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के रवैए में कोई बदलाव नहीं हुआ. जबकि कांग्रेस का नारा था 'वक्त है बदलाव का' पर कमलनाथ अपनी कार्यशैली में कोई बदलाव नहीं ला सके. आज भी विधायकों के लिए उनसे मिलना आसान नहीं है.