भोपाल। मप्र में ग्रामसभाओं की हालत सुधारने का काम शुरू किया जा रहा है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल में जनजातीय सम्मेलन के दौरान आदिवासियों के समक्ष वादा किया था कि ग्रामसभाओं को मजबूत बनाया जायेगा और इसकी बैठक समय पर करना भी सुनिश्चित होगी। खास बात यह है कि मप्र में पंचायत चुनाव की आहट है और माना जा रहा है कि कुछ दिनों के भीतर पंचायत चुनाव का ऐलान हो जायेगा ।
उल्लेखनीय है कि प्रशासनिक मशीनरी और निर्वाचन आयोग भी चुनावों की तैयारी में काफी समय से जुटा है। मप्र में पंचायतों व नगरीय निकायों के चुनाव प्रतीक्षित हैं। इधर सत्रों का कहना है कि शिवराज सरकार ग्राम सभाओं को अधिकार देने के लिए विधेयक लाएगी। यह विधेयक दिसंबर में प्रस्तावित विधानसभा के शीतकालीन सत्र में प्रस्तुत किया जा सकता है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने इसकी तैयारी प्रारंभ कर दी है। इसके माध्यम से ग्रामसभाओं को ग्राम के विकास कार्यों की कार्ययोजना बनाने से लेकर बाजार व मेले से लिए
जाने वाले शुल्क तय करने का अधिकार होगा। ग्रामीण विकास को गति देने के साथ पंचायतों को सशक्त बनाने के लिए ग्रामसभाओं को अधिकार संपन्न बनाया जाएगा। ग्रामसभा में गांव के सभी वयस्क सदस्य होंगे और आमराय से सारे निर्णय लिए जाएंगे।
सरकार चाहती है कि गांवों की विकास योजना भी ग्रामीण मिल-बैठकर तय करें। इसकस तहत ग्राम विकास योजना के आधार पर ग्रामसभा गांवों में कराए जाने वाले कामों की प्राथमिकता तय करेगी। इसके साथ ही पंचायतों की आय बढ़ाने के लिए गांव में लगने वाले
बाजार, मेले आदि से लिया जाने वाला शुल्क भी ग्रामसभा तय करेगी। पेसा अधिनियम के तहत 89 आदिवासी विकासखंडों में आने वाले गांवों में साहूकारी के लिए पंजीयन के बारे में भी अनुमति ग्रामसभा देगी। बताया जाता है कियदि ग्रामसभा एकराय होकर साहूकारी के लिए पंजीयन से इन्कार कर देती है तो फिर पंजीयन नहीं होगा।
इसी तरह यह भी प्रस्तावित है कि सामुदायिक वन प्रबंधन के तहत वन समिति तेंदूपत्ता संग्रहण और बेचने का काम करेगी। समिति को एक निश्चित अंश दिया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि अनुसूचित क्षेत्रों में व्यवस्था संबंधी किसी भी प्रकार का बदलाव करने के लिए विधानसभा की अनुमति जरूरी है, इसलिए विधेयक प्रस्तुत किया जाएगा। इस पर पहले वरिष्ठ सचिव समिति में विचार किया जाएगा और फिर विधि विभाग को भेजा जाएगा। यहां से हरी झंडी मिलने के बाद प्रस्ताव कैबिनेट के समक्ष विचार के लिए रखा जाएगा।