18000 पुलिसकर्मियों की कमी। आपराधिक अनुसंधान कैसे हो...
मध्य प्रदेश में एक लाख की आबादी की सुरक्षा सिर्फ 770 पुलिसकर्मियों पर है।
मध्यप्रदेश में बड़े इवेंट्स भी होते रहते हैं इन बड़े कार्यक्रमों में पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई जाती है वीआईपी की सेवा में अतिरिक्त पुलिस बल लगता है। पुलिस के ऊपर कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी है। पुलिस और भी इतर कार्य करती है।

मध्य प्रदेश पुलिस 18000 पुलिसकर्मियों की कमी से जूझ रही है।
एक अनुमान के मुताबिक मध्यप्रदेश में जितना बल उपलब्ध है उसके हिसाब से एक लाख की जनसंख्या पर केवल 770 पुलिसकर्मी हैं। इनमें आरक्षक से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तक शामिल हैं। सीधी सी बात है संख्या में कमी के चलते कर्मचारियों पर काम का एक्स्ट्रा बर्डन है।
आपराधिक मामलों की जांच जैसे कार्यों में भी इसके चलते देरी होती है। 2011 की जनगणना के मुताबिक मध्य प्रदेश की जनसंख्या 7 करोड़ 26 लाख थी वर्तमान की अनुमानित जनसंख्या लगभग आठ करोड़ 40 लाख होनी चाहिए।
आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में 125000 स्वीकृत बल है लेकिन उपलब्धता 107000 की है।
18000 पुलिसकर्मियों की कमी का असर प्रदेश की कानून व्यवस्था पर भी पड़ता है। सबसे ज्यादा इफेक्ट पुलिस के क्राइम रिसर्च जैसे कार्यों पर हो रहा है। एक अधिकारी के पास जरूरत से ज्यादा मामले होते हैं। सहायकों की भी कमी होती है इसलिए निराकरण में देरी होती है।
मध्यप्रदेश में पुलिस के ऊपर काम का बोझ पहले से ही है वीकली ऑफ की प्रथा सिर्फ दिखावे की है। पुलिसकर्मी अनेक तरह के स्ट्रेस का सामना कर रहे हैं। काम के बढ़ते बोझ के कारण पुलिसकर्मियों में तनाव आम है।
संख्या बल की कमी का खामियाजा उपलब्ध बल को भुगतना पड़ता है। भर्ती प्रक्रिया लगातार होती रहती है लेकिन कमी कब तक दूर की जाएगी इस बारे में कोई कुछ कहने की स्थिति नहीं है।