भोपाल. वन विहार नेशनल पार्क में शनिवार शिफ्ट किया तेंदुआ रात भर गुर्राता रहा। रविवार सुबह तक उसकी आक्रमता में कमी नहीं आई थी। उसे क्वारंटाइन सेंटर में रखा जा रहा था, शाम तक उसे हाउसिंग में शिफ्ट कर दिया जाएगा। इसे सिवनी के जंगल से बेहोश करके वन विहार लाया गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि तेंदुए ने तीन से चार लोगों पर हमला किया था, जिनमें उनकी मौत हो गई है। वन विहार में भी बीते 20 घंटे के व्यवहार को देखा जाए तो कोई बदलाव नही आया है। इस तरह के वन्य प्राणियों को कवर्ड में ही रखना चाहिए। खुला जंगल नहीं देना चाहिए। इनके द्वारा जानमाल को नुकसान पहुंचाने का खतरा बना रहता है। तेंदुए की आक्रामकता और हमला करने की पुरानी हिस्ट्री के तहत अब उसे खुला जंगल मिल पाना मुश्किल है। वन्य प्राणी विभाग हमेशा के लिए तेंदुए को कवर्ड में रखने पर विचार कर रहा है। इस तरह उसे पूरा जीवन वन विहार नेशनल पार्क में ही गुजराना पड़ेगा।
तेंदुए की उम्र दो से तीन वर्ष बताई जा रही है। उसका मूवमेंट दक्षिण सिवनी वन मंडल केसे कान्हीवाड़ा परिक्षेत्र की बांड्रापानी बीट में था जो कि पेंच टाइगर रिजर्व से जुड़ा हिस्सा है। वन्य प्राणी विभाग के अधिकारियों के मुताबिक उक्त तेंदुए पर काफी दिनों से नजर रखी जा रही थी। वह जंगल में बार-बार ठिकाना बदल रहा था, आबादी वाले इलाकों से खदेड़ने के बावजूद वह गांव व शहरों की तरफ निकल रहा था। उसका व्यवहार काफी आक्रमक हो गया था। जिसे शुक्रवार को बेहोश कर पकड़ा था।
पार्क में पहले से 10 तेंदुए हैं। इसे मिलाकर 11 हो जाएंगे। इनमें से अधिकतर को बाड़े में रखा जा रहा है। बाकी के हाउसिंग में हैं। सामान्य रूप से घायल होने पर वन विहार लगाए जाने वाले तेंदुए को इलाज के बाद प्राकृतिक रहवास में छोड़ा जा रहा है। हाल ही में एक तेंदुए को रातापानी वन्यजीव अभयारण्य और दूसरे को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के जंगल में छोड़ा है।
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सिवनी के जंगल से वन विहार लाया गया आदमखोर तेंदुआ
विशेषज्ञों का कहना है कि तेंदुए ने तीन से चार लोगों पर हमला किया था, जिनमें उनकी मौत हो गई है। वन विहार में भी बीते 20 घंटे के व्यवहार को देखा जाए तो कोई बदलाव नही आया है।