भोपाल. अश्लील हरकतें और महिला के लैंगिक उत्पीड़न के मामले में निलंबित अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मोहन मीणा अभी तक प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुख्यालय चार्जशीट तामील नहीं करा पाया है. जबकि राज्य शासन ने 18 अक्टूबर को शामिल कराने के लिए चार्जशीट मुख्यालय को भेज दी है. इस बीच निलंबित आईएफएस मीणा ने 20 अक्टूबर को मुख्यालय को बहाली करने का आवेदन देकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का प्रयास किया. राज्य शासन ने निलंबन की अवधि भी एक माह की बढ़ा दी है.

अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं तत्कालीन पदेन वन संरक्षक बैतूल मोहन मीणा को पुत्र के बैंक अकाउंट में ₹30000 डिपॉजिट कराने के मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाया गया है. इसके अलावा बिंदु शर्मा की अध्यक्षता वाली जांच कमेटी ने मोहन मीणा को अश्लील हरकतें, अनुचित आचरण और कार्यस्थल पर महिलाओं लैंगिक उत्पीड़न के लिए भी प्रथम दृष्टया दोषी ठहराया है. इसके कारण राज्य शासन ने 19 अगस्त को निलंबन का आदेश कर दिया.
अखिल भारतीय सेवा नियम के अनुसार निलंबित अधिकारी को 30 दिन के भीतर चार्जशीट जारी करने का प्रावधान है. निलंबित आईएफएस अधिकारी मीणा ने 20 अक्टूबर को पीसीसीएफ मुख्यालय को आवेदन देकर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश की. तब तक मीणा को या नहीं पता था कि राज्य शासन ने उनकी चार्जशीट 18 अक्टूबर को ही जारी कर दी है. यह बात अलग है कि समाचार लिखे जाने तक मुख्यालय ने राज्य शासन के आदेश की तामील ही नहीं कराई है.
वन्य प्राणी शाखा अभी तक जारी नहीं कर सका आरोप पत्र
निलंबित चल रहा है अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मोहन मीणा के खिलाफ 9 महीने से अधिक समय से वन्य प्राणी शाखा में आरोप पत्र लंबित है. प्रधान मुख्य वन संरक्षक वन्य प्राणी आलोक कुमार अभी तक मीणा के खिलाफ आरोप पत्र जारी नहीं कर सके. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सिंह परियोजना में पदस्थी के दौरान नियम विरुद्ध राजसात वाहनों को छोड़ने, वन्य प्राणी शिकार के आरोपियों की हिमायत करने और टूर डायरी में छेड़छाड़ करने का आरोप है. इस मामले में प्रधान मुख्य वन संरक्षक जेएस चौहान ने जांच कर उनके खिलाफ आरोप पत्र बनाकर पीसीसीएफ वन्य प्राणी को सौंप दिया था.