निलंबित चल रहे अखिल भारतीय वन सेवा के अधिकारी मोहन मीणा को 16 दिसंबर को लिखित शिकायत की है कि प्रार्थी मोहन मीणा अपर मुख्य वन संरक्षक पद पर मुख्यालय में पदस्थ था. पूर्व में वन वृत्त बैतूल मैं पदेन वन संरक्षक के पद पर कार्यरत था. अपनी शिकायत में मोहन मीणा ने लिखा है कि प्रार्थी से प्रकरण में ना तो कभी स्पष्टीकरण मांगा गया और ना ही कभी मुझे मेरा पक्ष रखने का मौका दिया गया. प्रकरण में एकतरफा कार्रवाई करते हुए 19 अगस्त 21 को प्रार्थी को निलंबित कर दिया गया. अतः प्रार्थी का निलंबन समाप्त कर बहाली की जावे. बीजीआर सेल मंत्रालय ने मोहन मीणा के शिकायत दर्ज कर भोपाल रेंजर शिवपाल पिपरदे को निराकरण के लिए कहा है. सीएम हेल्पलाइन से शिकायत मिलते ही रेंजर के हाथ-पैर फूल गए. उसे यह समझ नहीं आ रहा है कि वह क्या करें? इसकी वजह भी स्पष्ट है, क्योंकि यह मामला रेंजर के अधिकार क्षेत्र से बाहर है.
सीएम हेल्पलाइन की शिकायत को लेकर जब प्रमुख सचिव से लेकर मुख्यालय के शीर्षस्थ अधिकारियों से बातचीत की तो वह हंसे और चुप्पी साध गए. एक शीर्ष अधिकारी ने इतना जरूर कहा कि अखिल भारतीय वन सेवा के अधिकारियों का निलंबन बिना स्पष्टीकरण और सुनवाई का मौका दिए नहीं किया जा सकता. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि महिला उत्पीड़न और बेटे के अकाउंट में पैसे डलवाने के मुद्दे पर जांच हुई. जांच के निष्कर्ष के आधार पर मोहन मीणा को सुनवाई का अवसर भी दिया गया. यही नहीं उनसे स्पष्टीकरण भी मांगा गया, तब कहीं जाकर निलंबन के आदेश जारी हुए. मीणा के निलंबन संबंधित फाइल में यह सब संलग्न किया गया है. यानी सीएम हेल्पलाइन में एक आईएफएस अधिकारी ने शासन को गुमराह करने का प्रयास किया है. बात अलग है कि अभी उनके खिलाफ विभागीय जांच शुरू नहीं की गई है.
इनका कहना
यह शिकायत मेरे अधिकार क्षेत्र से बाहर है. इसके निराकरण के लिए मैं मुख्यालय को प्रकरण भेज रहा हूं.
शिवपाल पिपरदे, रेंजर( एल-1 अधिकारी) भोपाल