भोपाल।राज्य के गृह विभाग ने अपने दस कार्यालयों को ई-ऑफिस प्रणाली की सुरक्षा के संबंध में हिदायत जारी की है। इन दस कार्यालयों में पीएचक्यु, होमगार्ड, पुलिस हाउसिंग बोर्ड, सैनिक कल्याण संचालनालय, संपदा संचालनालय, लोक अभियोजन संचालनालय, मेडीकोलीगल संस्थान, स्टेट गैराज, राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण एवं आपदा प्रबंधन संस्थान शामिल हैं।

पुलिस मुख्यालय ने निर्देश दिये हैं कि इलेक्ट्रानिक फाइलों पर डिजिटल सिग्नेचर टोकन-डीएससी या ई-साईन का उपयोग किया जाये। गोपनीय एवं अति गोपनीय दस्तावेजों को केवल भौतिक रुप से ही प्रस्तुत किया जाये। एसएसओ-सिंगल साईन ऑन आधारित प्रमाणीकरण-आथेंटिफिकेशन का उपयोग किया जाये। केवल सुरक्षित नेटवर्क जैसे एनआईसीएनईटी/स्वान/एनकेएन के माध्यम से ही ई-ऑफिस के माध्यम से ही ई-ऑफिस वेब एपलीकेशन का उपयोग-एक्सेस किया जाये। प्राईवेट नेटवर्क पर ई-ऑफिस वेब एपलीकेशन तक पहुंचने हेतु वीपीएन-वर्चुअल प्राईवेट नेटवर्क का उपयोग-एक्सेस किया जाये।

 

प्रदेश के जिला न्यायालयों में सिविल जज अब जूनियर एवं सीनियर नाम से पहचाने जायेंगे

 

भोपाल।प्रदेश के जिला न्यायालयों में अब सिविल जज जूनियर एवं सीनियर नाम से पहचाने जायेंगे। इसके लिये राज्य के विधि विभाग ने 27 साल बाद मप्र न्यायिक सेवा भर्ती तथा सेवा शर्तें नियम 1994 में बदलाव कर दिया है।

दरअसल पहले जिला न्यायालयों में सिविल जज फस्र्ट क्लास या सेकण्ड क्लास अथवा व्यवहार न्यायाधीश एक या दो के नाम से जाने जाते थे। सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक निर्णय में सभी राज्यों के जिला न्यायालयों में यह नाम बदलकर जूनियर एवं सीनियर करने के लिये कहा था। इसीलिये अब यह बदलाव किया गया है।

अब सेकण्ड क्लास सिविल जज, व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ खण्ड यानि सिविल जज जूनियर डिविजन तथा फस्र्ट क्लास सिविल जज, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ खण्ड यानि सिविल जज सीनियर डिविजन कहलायेंगे।

विभागीय अधिकारी ने बताया कि सिविल जजों के नाम अनेक राज्यों में अलग-अलग हैं तथा सुप्रीम कोर्ट ने इनके नामों में एकरुपता लाने के लिये कहा हुआ है। इसीलिये यह संशोधन किया गया है।

डॉ. नवीन जोशी

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