उल्लेखनीय है कि साल्वेंसी सर्टिफिकेट अपनी अचल सम्पत्ति का मूल्यांकन कर उसकी कीमत के बराबर बनवाया जाता है तथा इसका उपयोग ठेकेदार टेण्डर आदि में अपनी वित्तीय क्षमता बताने के लिये करते हैं। यदि वह कोई चूक करता है तो साल्वेंसी सर्टिफिकेट में दी गई अचल सम्पत्ति से उसकी वसूली की जाती है। राज्य के राजस्व विभाग ने इस नये बदलाव के संबंध में जारी अधिसूचना में कहा है कि राजस्व अधिकारी बिना किसी जांच के उन लोगों को भी साल्वेंसी सर्टिफिकेट जारी कर देते हैं जो या तो ख्याति प्राप्त हैं या प्रभावशाली व्यक्ति हैं या वह राजस्व अधिकारी का परिचित है। जबकि ऐसा करना प्रतिबंधित है।
नये बदलाव के तहत अब छह प्रकार के व्यक्तियों को ही साल्वेंसी सर्टिफिकेट जारी किये जा सकेंगे। इनमें शामिल हैं : केंद्र या राज्य सरकार या उसके उपक्रम या स्थानीय निकायों के ठेकेदारों एवं उनके जमानतदारों को। शासकीय विभागों तथा कोर्ट ऑफ वार्डस के लेखकों के जमानतदारों को। दाण्डिक मामलों में जमानतदारों को। वन विभाग से लायसेंस प्राप्त विक्रेता को। उन व्यक्तियों को जिन से केंद्र या राज्य सरकार के किसी विभाग के नियमों के अधीन साल्वेंसी सर्टिफिकेट अपेक्षित है। उन व्यक्तियों को जिन्हें राज्य सरकार किन्हीं विशेष उपबंधों के अधीन साल्वेंसी सर्टिफिकेट अपेक्षित करने के निर्देश दे।
ये दे सकेंगे अब साल्वेंसी सर्टिफिकेट :
नायब तहसीलदार पांच लाख रुपये तक 30 दिनों में, तहसीलदार 25 लाख रुपये तक 30 दिनों में, एसडीओ राजस्व 50 लाख रुपये तक 45 दिनों में तथा जिला कलेक्टर 50 लाख रुपये से ऊपर 45 दिनों में साल्वेंसी सर्टिफिकेट प्रदान कर सकेंगे। इसके लिये आवेदन-पत्र के साथ सौ रुपये का शुल्क देना होगा तथा 5 लाख रुपये से ऊपर के साल्वेंसी सर्टिफिकेट हेतु 0.05 प्रतिशत की दर से प्रक्रिया शुल्क देना होगा। परन्तु राज्य सरकार के किसी विभाग के निर्देश के अनुपालन में जारी किये जाने वाले साल्वेंसी सर्टिफिकेट के लिये कोई शुल्क देय नहीं होगा। साल्वेंसी सर्टिफिकेट की वैधता छह माह तक प्रभावी रहेगी तथा इसके बाद फिर से नया सर्टिफिकेट बनवाना होगा।