दरअसल विधानसभा सचिवालय के प्रमुख्य सचिव एपी सिंह ने स्पीकर के स्थाई आदेश में बदलाव की सूचना जारी की है। 

इसमें नया प्रावधान जोड़ा गया है-

यदि कोई विधायक मंत्री या डिप्टी स्पीकर बन जाता है तो उसके द्वारा विधानसभा में लगाये गये प्रश्न आदि सूचनायें निरस्त हो जायेंगी तथा उस विधायक के सवाल विधानसभा सत्र में प्रश्नोत्तरी में मुद्रित हो जाते हैं तो उन्हें एक शुध्दि पत्र जारी कर विलोपित किया जा सकेगा।

दरअसल विधानसभा सत्र में न ही स्पीकर को, न ही डिप्टी स्पीकर को तथा न ही मंत्रिपरिषद सदस्य को सवाल करने या ध्यानाकर्षण, स्थगन, शून्यकाल आदि की सूचना देने का अधिकार होता है। इसीलिये सालों बाद यह नया प्रावधान किया गया है। इससे विधायकों में डिप्टी स्पीकर या मंत्री बनने की आस जाग गई है। उल्लेखनीय है कि विधानसभा में डिप्टी स्पीकर का पद मार्च 2020 से ही खाली पड़ा हुआ है जबकि मंत्रिपरिषद के विस्तार की अटकले पहले से ही चल रही हैं।