नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने इस शैक्षणिक वर्ष के लिए स्नातकोत्तर मेडिकल प्रवेश (पीजी प्रवेश) के लिए ईडब्ल्यूएस और ओबीसी आरक्षण को बरकरार रखा है, जिससे छात्रों को काफी राहत मिली है। न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना की पीठ ने शुक्रवार को यह आदेश पारित किया। कोर्ट ने कहा कि ओबीसी की वैधता को बरकरार रखा गया है। ईडब्ल्यूएस और ओबीसी आरक्षण को बरक़रार रखा जा रहा है ताकि चालू शैक्षणिक वर्ष में प्रवेश प्रक्रिया में कोई बाधा न हो। अदालत ने यह भी कहा कि वह अगले साल से पांडे समिति की सिफारिश को लागू करने की मंजूरी दे रही है। पीठ ने याचिका पर मार्च के तीसरे सप्ताह में अंतिम सुनवाई करने का फैसला किया है। इसके बाद ईडब्ल्यूएस मानदंड की वैधता तय की जाएगी।
NEET PG Counselling | Supreme Court will announce the judgement on Other Backward Class (OBC) and Economically Weaker Sections (EWS) quota in PG all India quota seats (MBBS/BDS and MD/MS/MDS) case today pic.twitter.com/IajzcY3WoL
— ANI (@ANI) January 7, 2022
अदालत ने गुरुवार को मामले में पक्षकारों को सुनने के बाद फैसले को बरकरार रखा। याचिकाएं अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण और स्नातकोत्तर चिकित्सा पाठ्यक्रमों के लिए अखिल भारतीय कोटे में ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत आरक्षण को चुनौती देती हैं। नीट द्वारा चुने गए उम्मीदवारों में से एमबीबीएस में 15 फीसदी सीटें और एमएस और एमडी कोर्स में 50 फीसदी सीटें अखिल भारतीय कोटे से भरी जाती हैं।
Supreme Court allows 27% reservation for Other Backward Class (OBC) and 10% for Economically Weaker Section (EWS) category in the All-India Quota (AIQ) seats for admission in the NEET for all medical seats as existing criteria this year.
— ANI (@ANI) January 7, 2022
गुरुवार को सुनवाई के दौरान केंद्र ने काउंसलिंग शुरू करने की इजाजत मांगी थी। वहीं, याचिकाकर्ताओं ने आरक्षण का विरोध किया। याचिकाकर्ता ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के लिए 8 लाख रुपये के मानदंड पर आपत्ति जताई और कहा कि 2.5 लाख रुपये की वैकल्पिक सीमा तय की जा सकती है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार का बचाव करते हुए दलील दी कि केंद्रीय विश्वविद्यालयों में 27 फीसदी ओबीसी कोटा और 10 फीसदी ईडब्ल्यूएस को आरक्षण दिया जा रहा है। यह जनवरी 2019 से प्रभावी है। यूपीएससी में भी यही कोटा दिया जा रहा है। इसने सामान्य वर्ग के लिए सीटों की संख्या में कमी नहीं की बल्कि सीटों की संख्या में 25 प्रतिशत की वृद्धि की। पीजी कोर्स में आरक्षण पर कोई रोक नहीं है।