भोपाल: प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों को पानी देने वाली नर्मदा घाटी विकास विभाग द्वारा निर्मित नहरों के रखरखाव हेतु 84 नवीन वाटर यूजर्स एसोसियेशन्स (जल उपभोक्ता संथाओं) का गठन किया गया है। इससे पहले विभाग के अंतर्गत 240 एसोसियेशन्स थीं जिनमें अब 84 नई एसोसियेशन्स की वृध्दि होने से इनकी संख्या बढक़र 324 हो गई है। ऐसी एसोसियेशन्स जल संसाधन विभाग के अंतर्गत भी गठित हैं तथा वह भी नई सिंचाई परियोजनाओं के लिये नवीन एसोसियेशन्स गठित करने की कार्यवाही कर रहा है। इन दोनों विभागों की एसोसियेशन्स के एक साथ कुछ समय बाद चुनाव होंगे। इन चुनावों में किसान ही चुने जाते हैं तथा वे नहरों से पानी देने के बदले शुल्क भी वसूलते हैं।
नर्मदा घाटी विकास विभाग के अंतर्गत गठित 84 नवीन एसोसियेशन्स दस परियोजनाओं वाले छह जिलों के 506 ग्रामों में 1 लाख 61 हजार 347 हैक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई देने के लिये हैं। ये दस परियोजनायें हैं : खण्डवा जिले में छैगांव माइक्रो उद्वहन सिंचाई योजना, हरसूद माईक्रो उद्वहन सिंचाई योजना, कोदवार माईक्रो उद्वहन सिंचाई योजना, भुरलाय उद्वहन सिंचाई योजना तथा पुनासा-विस्तार माईक्रो उद्वहन सिंचाई योजना। बड़वानी जिले में बिस्टान माईक्रो उद्वहन सिंचाई योजना। खरगौन जिले में अपरवेदा मेन केनाल दांयी तट एवं बलवाड़ा माईक्रो सिंचाई योजना। अलीराजपुर जिले में अलीराजपुर माईक्रो उद्वहन सिंचाई योजना। इंदौर/उज्जैन जिले में नर्मदा मालवा गंभीर उद्वहन गंभीर लिंक परियोजना।
उल्लेखनीय है कि इन वाटर यूजर्स एसोसियेशन्स का गठन मप्र सिंचाई प्रबंधन में कृषकों की भागीदारी अधिनियम 1999 के तहत किया जाता है और हर पांच साल में इनके चुनाव कराये जाते हैं। वर्तमान में सभी एसोसियेशन्स में कार्यकाल खत्म होने के कारण प्रशासक नियुक्त हैं तथा जल्द इनके चुनाव कराये जायेंगे।