मध्य प्रदेश के हाथियों की दरकार है, लेकिन पालतू हाथियों की कमी पूरे देश में बनी हुई है, ऐसे में मध्यप्रदेश के वन विभाग को हाथी मिले भी तो कैसे...
एक दशक से मध्यप्रदेश का वन विभाग पालतू हाथियों की संख्या बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन यह संख्या बढ़ने की बजाय घटती जा रही है। कुछ हाथी बुजुर्ग होते जा रहे हैं तो कुछ निगरानी के लिए अनुपयुक्त।
मध्यप्रदेश में बाघों की मौत की घटनाएं लगातार सामने आती है।बाघ द्वारा आम नागरिकों पर हमले की घटनाएं भी चिंता का सबब बनती है। पिछले 5 साल में मध्यप्रदेश में 140 बाघों की मौत हो चुकी है। इस दौरान कई लोगों को बाघों के हमलों के कारण जान से हाथ धोना पड़ा है।
बाघ और ग्रामीणों के बीच संघर्ष की घटनाएं भी देखी गईं। बाघ संरक्षण में जरूरी पालतू हाथियों की कमी कैसे पूरी होगी?
शेरों की सुरक्षा पर सवाल:
मध्यप्रदेश में बाघों के संरक्षण के लिए कई काम किए जा रहे हैं। लेकिन बाघ के संरक्षण में हाथियों की कमी बाधा बन सकती है।
एक रिपोर्ट के मुताबिक मध्यप्रदेश में फॉरेस्ट डिपार्टमेंट के पास 50 से ज्यादा एलीफेंट हैं लेकिन इनमें से सिर्फ 31 ही गश्ती के लिए यूज किए जा सकते हैं। बाकी बचे हुए 15-20 हाथी या तो बुजुर्ग हो गए हैं या इस काम के लिए उपयुक्त नहीं हैं।
मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। फॉरेस्ट, फील्ड और बढ़ती बाघों की संख्या को मॉनिटर करने के लिए एमपी में कम से कम 50 हाथी जरूरी है।
फारेस्ट डिपार्टमेंट की कोशिश है कि कर्नाटक राजस्थान और अंडमान सहित कई दूसरे राज्यों से हाथी लाए जाएं। हालांकि मध्यप्रदेश को उपयुक्त हाथी नहीं मिल रहे। एक तरफ तो मध्यप्रदेश में बंगाल से आए हाथी उत्पात मचा रहे हैं, दूसरी तरफ पालतू हाथी की घटती संख्या चिंता का सबब बनी हुई है।
मध्यप्रदेश में कई जगह शेरों ने इंसानों का शिकार किया है। ऐसे क्षेत्रों में वन विभाग की रेस्क्यू की टीम को जंगलों को मॉनिटर करने के लिए हाथी की जरूरत पड़ती है, लेकिन हाथी उपलब्ध नहीं होते।
ऐसा ही एक मामला हरदा में सामने आया था। जनवरी माह में हरदा जिले के एक गांव में एक बाघ घुस आया, इस बाघ ने इंसानों पर तीन बार हमले किए, जिसमें एक की डेथ हो गई। ग्रामीण भी बाघ के खून के प्यासे हो गए, लेकिन बाघ को वन विभाग नहीं ढूंढ पाया। यहां बाघ को खोजने के लिए हाथी की जरूरत थी, हाथी मौजूद नहीं था। करीब 200 किलोमीटर दूर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से हाथी मंगवाया गया। ट्रक में लादकर इस हाथी को लाया गया और तब जाकर काम हुआ।
भोपाल रेंज में भी एक बार हाथी की सख्त जरूरत थी, हाथी के सहारे वन विभाग के अमले को घने जंगल में जाना था लेकिन हाथी मौजूद नहीं था। 130 किलोमीटर दूर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व से पालतू हाथी मंगाए गए।
बाघ के प्रोटेक्शन में हाथियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेकिन हाथियों की कमी से प्रोटेक्शन और निगरानी में बाधा होती है। मध्यप्रदेश में इस वक्त लगभग 530 बाघ हैं, लेकिन इनकी निगरानी के लिए सिर्फ 30-35 हाथी ही लगे हुए हैं। भोपाल के आसपास ही काफी संख्या में बाघ मौजूद हैं।
विशेषज्ञ कहते हैं कि जंगल के कुछ हिस्सों में व्हीकल से जाना संभव नहीं होता। इसलिए बाघों तक पहुंचने के लिए कई बार हाथी की सख्त जरूरत होती है। एक और समस्या होती है कि वाहन की आवाज से बाघ-शेर अलर्ट हो जाते हैं। लेकिन हाथी के साथ इन तक पहुंचना ज्यादा आसान होता है। कई बार मध्यप्रदेश में रेस्क्यू किए गए हाथियों को इस काम में लगाया जाता है।
पालतू हाथी का संरक्षण भी बहुत महत्वपूर्ण है कई बार इनकी सही ढंग से केयर न करने की खबरें भी सुर्खियां बनती है।