भोपाल. मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान कि वन विभाग से दो प्रमुख ड्रीम अपेक्षाएं थी. पहली इच्छा थी कि मुख्यमंत्री निवास के पास बने वन विहार की सूरत सिंगापुर जैसी हो. दूसरी मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर पालपुर कूनो में चीता लाने की. दोनों ही मंशा पर पानी फिर गया.
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श्योपुर जिले के पालपुर कूनो में चीता की बसाहट की तैयारियां जोरों पर चल रही है. फील्ड से मिली जानकारी के अनुसार जनवरी तक सभी तैयारियां पूरी हो जाएगी. चीता प्रोजेक्ट पर जब काम शुरू हुआ तब वनमंत्री विजय शाह ने महकमे के अधिकारियों के दम पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को आश्वस्त किया कि मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस पर दक्षिण अफ्रीका से चीता पालपुर कूनो आ जायगा. वन मंत्री विजय शाह के आश्वासन और जंगल महकमे के शीर्ष अधिकारियों की कार्य दक्षता पर भरोसा करते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी स्थापना दिवस पर चीता लाने घोषणा कर दी थी. पालपुर कूनो में भी चीता लाने की तैयारियों के लिए पहले टेंडर को लेकर विवाद बढ़ा. मामला सुलझा तब तक बहुत देर हो गई थी, क्योंकि बारिश ने अपना रौद्र रूप दिखाया. स्थापना दिवस पर चीता लाने की अरमानों पर पानी फिर गया.
इसी प्रकार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 9 महीने पहले वन विभाग के अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक में वन विहार को सिंगापुर चिड़ियाघर की स्टाइल में डेवलप करने की इच्छा व्यक्त की. बैठक में मुख्यमंत्री चौहान ने कहा था कि सिंगापुर चिड़ियाघर की तर्ज पर डेवलप होने पर देश-विदेश से आने वाले मेहमानों को वन विहार की सफारी करा सकू. मुख्यमंत्री की इच्छा को अधिकारियों ने बड़ी गंभीरता से लिया. इको पर्यटन बोर्ड ने इंदौर के आर्किटेक्ट को ठेका देकर डिजाइन भी तैयार करा ली. अधिकारियों के तबादले के साथ प्राथमिकताएं बदलती रहीं. नक्शे में संशोधन भी हुए पर काम शुरू नहीं हो सका. वन विहार के अधिकारियों की माने तो इको पर्यटन बोर्ड और विभाग की ओर से बजट नहीं मिल पाया. बजट के अभाव में काम लटक गया. सूत्रों ने बताया कि शीर्ष अधिकारी इस दिशा में कोई रुचि नहीं ले रहे हैं.