भोपाल: वीवीआईपी यानि केंद्रीय मंत्रियों, राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं मंत्रियों, सांसदों, विधायकों, सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट के जजों, मुख्य सचिवों, एसीएस, पीएस तथा उपक्रमों के अध्यक्ष एवं एमडी के खिलाफ भ्रष्टाचार के प्रकरणों में जांच या पूछताछ या अनुसंधान के लिये अब डीजीपी लेवल के अधिकारियों को पूर्वानुमति लेनी होगी। इस अनुमति को लेने के लिये तीन माह पहले सूचना देनी होगी, वह भी निर्धारित चेकलिस्ट के अनुसार प्रकरण की जानकारी देकर।


उक्त संबंध में केंद्र सरकार एवं मप्र सरकार ने नयी एसओपी जारी कर दी है। भ्रष्टाचार के ये वह मामले होंगे जो उक्त वीवीआईपी द्वारा अपने पद पर रहते किसी सिफारिश या निर्णय से उद्भुत हुये हैं। भ्रष्टाचार के ऐसे प्रकरण जिनमें आरोपी रंगे हाथों पकड़ा जाये, उसमें ऐसी कार्यवाही नहीं होगी। राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून की नई धारा 17 ए के तहत जांच या पुछताछ या अनुसंधान के लिये जांच एजेन्सियों से सूचना ग्राह्य करने के लिये प्रत्येक विभाग में अवर सचिव एवं उससे ऊपर के अधिकारियों को प्राधिकृत अधिकारी बनाने के लिये कहा है तथा इन अधिकारियों के नाम, ई-मेल आईडी एवं मोबाईल नंबर एक सप्ताह में उपलब्ध कराने के निर्देश दिये हैं। उक्त वीवीआईपी से नीचे के सरकारी सेवकों के लिये एडीजीपी, आईजी, एसएसपी, एसपी, एएसपी को जांच या पूछताछ या अनुसंधान के लिये अधिकृत किया गया है।


सूचनायें वेबसाईट पर डालें :


राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागो सें यह भी कहा है कि वे उन सभी सूचनाओं को अपनी वेबसाईट पर डालें जिनके लिये आम लोग अक्सर सूचना का अधिकार कानून के तहत जानकारी मांगते हैं। इसमें खरीदी, टेण्डर, जारी परिपत्र, आदेश आदि शामिल किये गये हैं। गोपनीय सूचनाओं को डालने से उन्हें मुक्त किया गया है। यहां तक कि सूचना के अधिकार कानून के तहत आये आवेदनों एवं उसमें दी गई सूचनाओं को भी वेबसाईट पर डालने के लिये कहा गया है।