भोपाल। राज्य सरकार ने वित्त संहिता-1 में नया संशोधन कर दिया है। इसके अनुसार, अब विभागों को न्यायालीयन आदेशों के पालन में कॉस्ट के भुगतान की भी जानकारी वित्त विभाग को देनी होगी।

दरअसल विभागों को पहले यह अधिकार था कि वे अपने यहां नियोजित कार्मिकों के व्यक्तिगत स्वत्वों के प्रकरणों को छोडक़र न्यायालीयन आदेशों के पालन में ब्याज तथा शास्ति के भुगतान की जानकारी वित्त विभाग को दें। इसमें न्यायालय द्वारा लगाई कॉस्ट की जानकारी वित्त विभाग को देना जरुरी नहीं था।

इसीलिये अब वित्त संहिता में संशोधन कर कॉस्ट की जानकारी भी वित्त विभाग को देना जरुरी कर दिया गया है। उल्लेखनीय है कि न्यायालय पर समय पर उपस्थित न होने या समय पर जवाब न देने या अन्य कारणों से  न्यायालय द्वारा कई बार कॉस्ट (एक प्रकार का जुर्माना) लगाया जाता है।

विभागीय अधिकारी ने बताया कि वित्त संहिता में विभागों द्वारा न्यायालयीन आदेश पर कॉस्ट के भुगतान की जानकारी वित्त विभाग को पृष्ठांकित करने का प्रावधान नहीं था, इसीलिये अब इसका भी प्रावधान कर दिया गया है, ताकि वित्त विभाग की जानकारी में भी ऐसे मामले हों।