भोपाल। राज्य के गृह विभाग के अधीन कार्यरत लोक अभियोजन संचालक ने सभी जिलों के अभियोजन अधिकारियों को परिपत्र भेजकर कहा है कि जिला स्तर से प्राप्त होने वाले आपराधिक प्रकरणों की वापसी के प्रस्तावों में तथ्यात्मक जानकारी का अभाव रहता है जिससे राज्य शासन को केस वापसी के अभिमत को भेजने में कठिनाई आती है और जिलों से बार-बार पत्राचार करना पड़ता है जिससे देरी होती है।
इसलिये अब प्रकरण वापसी के संबंध में जिला समितियों को एक निर्धारित प्रारुप में प्रस्ताव भेजने होंगे जिसमें लोक अभियोजन अधिकारी, एसपी एवं कलेक्टर के हस्ताक्षर होंगे।
यह जानकारी देनी होगी :
अब जिलों को प्रकरण वापसी हेतु निर्धारित प्रारुप में 16 बिन्दुओं पर जानकारी देनी होगी। इसमें शामिल है : क्या आगामी दो वर्षों में प्रकरण का न्यायालय से निराकरण संभावित है? प्रकरण की वापसी में कोई लोकहित है? क्या आरोपी द्वारा साक्षियों को डराया-धमकाया जा रहा है? क्या प्रकरण केंद्र सरकार की सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाने सं संबंधित है? क्या इस प्रकरण की विवेचना सीबीआई द्वारा की गई है? क्या आरोपी फरार रहा है या फरार चल रहा है?