भोपाल: प्रदेश की जेलों में बंद विचराधीन कैदियों को किसी जेल अपराध में न्यायालय से मिली सजा के तीन साल पूरे होने पर पैरोल मिल सकेगी। इसके लिये राज्य सरकार ने 32 साल पहले बने मप्र बंदी छुट्टी नियम 1989 में नया बदलाव कर दिया है।

उल्लेखनीय है कि पहले प्रावधान था कि विचाराधीन कैदी (ऐसा कैदी जिसे न्यायालय ने न्यायिक हिरासत में जेल भेजा है तथा जिसके अपराध का विचारण न्यायालय में चल रह है व उसे सजा नहीं मिली है), यदि जेल में रहते कोई अपराध करता है, तो उसे पैरोल (जेल से विशेष कारणों जैसे विवाह, किसी परिजन की मृत्यु आदि पर कुछ समय के लिये छुट्टी दी जाना) पर जाने ही इजाजत नहीं होती थी क्योंकि उसने जेल के अंदर अपराध किया है। इस प्रावधान को लम्बे समय बाद अब राज्य सरकार अमानवीय माना तथा ऐसे विचारधीन कैदी को भी पैरोल पर जाने का नया प्रावधान कर दिया है। जिस जेल अपराध पर विचारधीन कैदी को न्यायालय द्वारा सजा दी गई है, उसके तीन साल तक इस विचाराधीन कैदी को अपना आचरण जेल में अच्छा रखना होगा तभी वह तीन साल बाद पैरोल का लाभ ले सकेगा।

विभागीय अधिकारी ने बताया कि जेल में बंद विचाराधीन कैदियों को जेल अपराध पर पैरोल का लाभ नहीं दिया जाता था। राज्य सरकार ने इसे अमानवीय माना है तथा जेल अपराध की तीन साल सजा भुगतने के बाद उसे पैरोल पर जाने का नया प्रावधान कर दिया है।