यह द्वीप हिन्दू पवित्र चिन्ह ॐ के आकार में बना है। यहाँ दो मन्दिर स्थित हैं।
ॐकारेश्वर मन्दिर एवं अमलेश्वर ( ममलेश्वर )मन्दिर ।
🌹ॐकारेश्वर का निर्माण नर्मदा नदी से स्वतः ही हुआ है। यह नदी भारत की पवित्रतम नदियों में से एक है ।जिस ओंकार शब्द का उच्चारण सर्वप्रथम सृष्टिकर्ता विधाता के मुख से हुआ , वेद का पाठ इसके उच्चारण किए बिना नहीं होता है। इस ओंकार का भौतिक विग्रह ओंकार क्षेत्र है। इसमें 68 तीर्थ हैं। यहाँ 33 करोड़ देवता परिवार सहित निवास करते हैं तथा 2 ज्योतिस्वरूप लिंगों सहित 108 प्रभावशाली शिवलिंग हैं। मध्यप्रदेश में देश के प्रसिद्ध 12 ज्योतिर्लिंगों में से 2 ज्योतिर्लिंग विराजमान हैं। एक उज्जैन में महाकाल के रूप में और दूसरा ओंकारेश्वर में ममलेश्वर (अमलेश्वर) के रूप में विराजमान हैं।
यह ऐसा एकमात्र ज्योतिर्लिंग है जो नर्मदा के उत्तर तट पर स्थित है l भगवान शिव प्रतिदिन , तीनो लोकों में भ्रमण करने के पश्चात यहाँ आकर विश्राम करते हैं l अतएव यहाँ प्रतिदिन भगवान शिव की विशेष शयन व्यवस्था एवं आरती की जाती है तथा शयन दर्शन होते हैं l भगवान् ओंकारेश्वर की शयन आरती के पश्चात रात्रि 9 बजे से 9 : 30 बजे तक भगवान् के शयन दर्शन होते है। जिसमे भगवान् के शयन हेतु चांदी का झूला लगाया जाता है , तथा शयन सेज बिछाई जाती है , तथा सेज पर चोपड़ पासा सजाया जाता है एवं संपूर्ण गर्भगृह का आकर्षक श्रृंगार किया जाता है। ऐसी किवदंती है कि प्रतिदिन भगवान् भोलेनाथ एवं माता पार्वती रात्रि विश्राम हेतु यहाँ विराजते है। अतः श्रद्धालु एवं दर्शनार्थी भगवान् ओंकारेश्वर के शयन दर्शन अवश्य करे। यदि श्रद्धालु एवं दर्शनार्थी अपने शुभ प्रसंगों के अवसर पर विशेष शयन श्रृंगार पूजन कराना चाहते है तो ऑनलाइन बुक कर सकते हैं अथवा मन्दिर कार्यालय में संपर्क कर जानकारी प्राप्त कर सकते है।
इस व्यवस्था में प्रतिदिन एक परिवार ( 5 व्यक्ति अधिकतम ) को शयन श्रृंगार पूजन , विशेष प्रसाद एवं प्रथम दर्शन दिए जाते हैं l
राजा मान्धाता ने यहाँ नर्मदा किनारे , इस पर्वत पर तपस्या करके भगवान शिव को प्रसन्न किया और शिवजी के प्रकट होने पर उनसे यहीं निवास करने का वरदान माँग लिया। तभी से उक्त प्रसिद्ध तीर्थ नगरी ओंकार-मान्धाता के रूप में पुकारी जाने लगी।
नर्मदा क्षेत्र में ओंकारेश्वर सर्वश्रेष्ठ तीर्थ है। शास्त्र मान्यता है कि कोई भी तीर्थयात्री देश के भले ही सारे तीर्थ कर ले किन्तु जब तक वह ओंकारेश्वर आकर किए गए तीर्थों का जल लाकर यहाँ नहीं चढ़ाता उसके सारे तीर्थ अधूरे माने जाते हैं। ओंकारेश्वर तीर्थ के साथ नर्मदाजी का भी विशेष महत्व है। शास्त्र मान्यता के अनुसार जमुनाजी में 15 दिन का स्नान तथा गंगाजी में 7 दिन का स्नान जो फल प्रदान करता है , उतना पुण्यफल नर्मदाजी के दर्शन मात्र से प्राप्त हो जाता है।ओंकारेश्वर तीर्थ क्षेत्र में चौबीस अवतार , माता घाट ( सेलानी ) , सीता वाटिका , धावड़ी कुंड , मार्कण्डेय शिला , मार्कण्डेय संन्यास आश्रम , अन्नपूर्णाश्रम , विज्ञान शाला , बड़े हनुमान , खेड़ापति हनुमान , ओंकार मठ , माता आनंदमयी आश्रम , ऋणमुक्तेश्वर महादेव , गायत्री माता मन्दिर , सिद्धनाथ गौरी सोमनाथ , आड़े हनुमान , माता वैष्णोदेवी मन्दिर , चाँद-सूरज दरवाजे , वीरखला , विष्णु मन्दिर , ब्रह्मेश्वर मन्दिर , सेगाँव के गजानन महाराज का मन्दिर , काशी विश्वनाथ , नरसिंह टेकरी , कुबेरेश्वर महादेव , चन्द्रमोलेश्वर महादेव के मन्दिर भी दर्शनीय हैं।