भोपाल: प्रदेश के वन क्षेत्रों की सीमा को चिन्हित करने के लिये 17 हजार मुनारे लगाई जायेंगी। इसके लिये वन मुख्यालय ने कैम्पा फण्ड से साढ़े करोड़ रुपये विभिन्न वनमंडलों को जारी किये हैं। 21 साल में एक मुनार लगाने की लागत में पांच गुना से अधिक वृध्दि हो गई है। जनवरी 2000 में एक मुनार की लागत 800 रुपये आंकलित की गई थी परन्तु अब 5 हजार रुपये प्रति मुनार लागत स्वीकृत की गई है।
दरअसल सर्वोच्च न्यायालय ने गोदावर्मन विरुध्द भारत सरकार के प्रकरण में एक समिति गठित की थी तथा इस समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि मप्र में वन क्षेत्रों की सीमायें स्पष्ट नहीं हैं जिससे वन क्षेत्रों में अतिक्रमण, अवैध उत्खनन की संभावना बढ़ती है। पीसीसीएफ वन बल ने सभी वनसंरक्षकों को भेजे परिपत्र में उक्त समिति की रिपोर्ट के बारे में उल्लेख करते हुये कहा था कि प्रदेश के मुख्य सचिव ने सर्वोच्च न्यायालय में जवाबदावा पेश कर कहा था कि वन क्षेत्रों की सीमा पर पक्के मुनारे बनाये जायेंगे। वर्ष 2000 के वित्त वर्ष में इसके लिये चार करोड़ रुपये आवंटित किये गये थे तथा एक मुनार की लागत का अनुमान 800 रुपये आंकलित किया गया था। लेकिन वर्तमान वित्त वर्ष में कैम्पा फण्ड से साढ़े आठ करोड़ रुपये आवंटित किये गये हैं जिसमें एक मुनार की लागत 5 हजार रुपये आंकी गई है। मुनारे पत्थर, चूना एवं सीमेंट से बनाने के लिये कहा गया है।
वन मुख्यालय ने सभी वनमंडलों से कहा है कि वे ये सत्रह हजार मुनारें पहले उन स्थानों पर बनायें जहां वन भूमि के संबंध में विवाद है एवं अतिक्रमण होता है। एक वनखण्ड में उसकी पूरी सीमा में मुनारें लगाई जायें।
विभागीय अधिकारी ने बताया कि कैम्पा फण्ड से वनमंडलों को सीमेंट की पक्की मुनारे बनाने के लिये साढ़े आठ करोड़ रुपये का बजट जारी किया गया है। मुनारे बनाने के लिये सामग्री का भी परिवहन करना होता है इसलिये 5 हजार रुपये लागत निर्धारित की गई है।