भोपाल: राज्य सरकार ने अपनी एथेनॉल एवं जैव ईंधन प्रोत्साहन योजना जारी कर दी है। इसमें उन कंपनियों को डेढ़ रुपये प्रति लीटर सरकारी सब्सीडी दी जायेगी जो प्रदेश में एथेनॉल के उत्पादन हेतु प्लांट एवं मशीनरी में सौ प्रतिशत इन्वेस्टमेंट करेंगी।

इसके अलावा, कंपनियों को स्टाम्प ड्यूटी एवं रजिस्ट्रेशन चार्ज का सौ प्रतिशत भुगतान भी किया जायेगा तथा 5 साल के लिये विद्युत शुल्क में सौ प्रतिशत छूट दी जायेगी। क्वालिटी सर्टिफिकेशन लेने पर किये गये व्यय का 50 प्रतिशत अथवा एक लाख रुपये जो भी कम हो दिया जायेगा। पेटेंन्ट लेने पर किये गये व्यय का सौ प्रतिशत या अधिकतम पांच लाख रुपये का भुगतान किया जायेगा। जीरो लिक्विड डिस्चार्ज पर 50 प्रतिशत केपिटल सब्सिडी जोकि अधिकतम एक करोड़ रुपये है, दी जायेगी।

इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट सब्सिडी के अंतर्गत पॉवर, वॉटर व रोड बनाने पर किये गये व्यय का 50 प्रतिशत अधिकतम एक करोड़ रुपये भुगतान किया जायेगा। रोजगार के लिये कौशल विकास करने पर तीन माह तक प्रति वर्कर 5 हजार रुपये का भुगतान किया जायेगा और वर्कर के पीएफ/ईपीएफ हेतु 5 साल तक प्रति वर्कर 6 हजार रुपये का सरकार की ओर से भुगतान किया जायेगा। साथ ही पांच साल तक वर्करों के मेडिकल इंश्योरेंस की प्रीमीयम का भुगतान भी किया जायेगा। इसके अलावा, 5 साल तक एथेनॉल बनाने के लिये क्रय किये गये ग्रेन पर मण्डी शुल्क से सौ प्रतिशत छूट प्रदान की जायेगी।

ये रहेंगी शर्ते :

कंपनी को स्टेण्ड अलोन एथेनॉल प्रोडक्शन यूनिट डालना होगी तथा उसे 10 करोड़ रुपये से अधिक की लागत लगाना होगी। कंपनी को अपने प्रोडक्शन का 75 प्रतिशत एथेनॉल, आईल मेनुफैक्चरिंग कंपनियों को सप्लाय करना होगा। एथेनॉल अच्छे ग्रेन से बनानी होगी तथा इसमें मोलासिस एवं महुआ का उपयोग नहीं किया जा सकेगा। 31 मार्च 2024 के पहले उत्पादन शुरु करने वाली कंपनियों को ही इस योजना का लाभ मिल सकेगा।

उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार की वर्ष 2018 में जारी नीति के तहत वर्ष 2022 तक पैट्रोल में एथेनॉल का दस प्रतिशत तथा इसके बाद वर्ष 2025 तक बीस प्रतिशत सम्मिश्रण किया जाना है जिससे पैट्रोल के लिये विदेश से कच्चे माल के आयात पर किये जासने वाले भारी भरकम व्यय को कम किया जा सके।