समय पर जांच से ठीक हो सकती है यह जन्मजात बीमारी|

जन्मजात दिल की बीमारियां व गर्भकाल में प्रण विकास के दो कुछ कमियां रह जाने के कारण पनप जाती है। यद्यपि इन जन्मजात विकारों का कोई ठोस कारण अभी तक चिकित्सा विज्ञान नहीं खोज सका है लेकिन समय रहते जांयें और इलाज कराने से शिशु का आगामी जीवन ठीक से गुजरता है। 

एक और कारण है जिस पर चिकित्सा विज्ञानियों का ध्यान गया है और वह है ब्लूनैस या स्यानोसिस इस अवस्था में शिशु जन्म के समय पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाने के कारण नीला पड़ जाता है उस वजह से भी जन्मजात दिल की बीमारी पनप जाती है।

कई हैं कारण बच्चों में जन्मजात दिल की बीमारी के..

कुछ जन्मजात दिल की बीमारियां माता के गर्भकाल के दौरान किन्हीं खास किस्म की बीमारियों के संपर्क में आने के कारण भ्रूण में पनप जाती है। बेबी का हार्ट गर्भधारण के शुरुआती चलते में ही विकसित होता है। 

इस दौरान यदि माता एंटीपीलेप्टिक यानी मिर्गी के दौरे के इलाज की दवाएं ले रही हो तो भ्रूण का हार्ट पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता है। इसी तरह अनियंत्रित डायबिटीज और वायरल इंफेक्शन जैसी बीमारियां भी गर्भकाल के शुरुआती चंद महीनों में हो जाएं तब भी नवजात दिल की बीमारियों के साथ पैदा होता है। माता द्वारा गर्भकाल में धूम्रपान करने से भी भ्रूण का दिल पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता है।

क्या हो सकते हैं दिल की बीमारियों के लक्षण:

1. सांस उखड़ना,

2. खांसी के साथ अस्थमा का अटैक आना,

3. हार्ट द्वारा पर्याप्त मात्रा में ब्लड पप नहीं कर पाने के कारण हार्ट फेलियर,

4. इसी कारण से फेफड़ों में फ्ल्युइड जमा हो जाना,

ब्लू बेबीज:

बच्चे के जन्म के समय उसका नीला पड़ जाना चिंता का विषय है और उसे तुरंत पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट को दिखाना चाहिए। इस दौरान बच्चे के सीने का एक्सरे कराने से लेकर इको कार्डियोग्राफी कराने तक किसी भी जांच में पीछे नहीं हटना चाहिए। याद रखें कि ब्लू बेबीज को तुरंत इलाज की जरूरत होती है।

जितनी जल्दी जांच उनती ही जल्दी इलाज शुरू:

गर्भकाल में से भी शिशुओं में इनमें से किसी भी बीमारी के लक्षण दिखाई देते ही विशेषज्ञों की सेवाएं लेना चाहिए। बच्चों के दिल की बीमारियों का इलाज जितनी जल्दी शुरू होगा उतने ही सफल इलाज के अवसर बढ़ जाते हैं। 

बच्चे की दिल की बीमारियों की जाये तुरंत कराएं और बीमारी को स्पष्टता से पहचानने का आग्रह करें। बहुत ही कम मामलों में बच्चों में सीने में दर्द की शिकायत होती है। अगर बच्चे के सीने में दर्द की शिकायत समझ में आ रही हो तो तुरंत पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट को दिखाएं।

दिल का आकार, बड़ा होना चिंता का विषय..

कई बार माता पिता अपने बच्चे के दिल का आकार बड़ा होने के कारण चिंतित होते हैं। उन्हें यह जानना चाहिए कि दिल का आकार सामान्य से बड़ा होना कोई बीमारी नहीं है बल्कि किसी छिपी हुई बीमारी का चेतावनी संकेत है। 

दिल के आकार का बड़ा होना कई बार जानलेवा समस्याएं भी खड़ी कर देता है। बड़े आकार के दिल का प्रमुख कारण दिल में छेद होना माना जाता है। इसे एएसडी यानी आर्टिरियल सेप्टल डिफेक्ट्स का प्रमुख कारण माना जाता है। हार्ट के वाल्व की यह बीमारी जन्मजात होने के साथ-साथ बाद में भी हो सकती है।

यह बीमारी दिल की मांसपेशियों से संबंधित है। इसमें दिल के आसपास फ्लूइड जमा हो जाता है। रेड ब्लड सेल्स का काउंट कम हो जाता है, थायराइड के क्रियाकलाप खराब हो जाते है। इन सभी के साथ पल्मोनरी हाइपरटेंशन और एमीलॉयडोसिस जैसी दुर्लभ बीमारी भी हो सकती है। इन सभी बीमारियों को कवल पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजिस्ट को दिखाकर ही ठीक किया जा सकता है।