भोपाल। प्रदेश में प्राकृतिक रुप से मरे वन्यप्राणियों के प्रकरण अब क्लोज (नस्तीबध्द) किये जा सकेंगे। क्लोज करने का अधिकार भी चार स्तर के अधिकारियों को राज्य शासन ने प्रदान कर दिया है। उल्लेखनीय है कि जंगलों में अक्सर वन्यप्राणी मृत मिलते हैं। वनों के आसपास के हाईवे एवं रेल मार्गों पर भी वन्यप्राणी टक्कर से मारे जाते हैं।

ऐसे प्रकरणों में कई वर्ष तक प्रावधान था कि यदि ऐसी मौत प्राकृतिक कारणों से हुई है और इसमें कोई दोषी नहीं है, तो इन मामलों में पीओआर (प्रिलिमरी ऑफेन्स रिपोर्ट जोकि पुलिस की तरह वन विभाग की एफआईआर होती है) नहीं दर्ज की जाये। बाद में वन विभाग ने आदेश जारी किया कि ऐसे मामलों में भी पीओआर दर्ज कर जांच की जाये।

उक्त मामलों में पीओआर दर्ज होने से वन विभाग के पास लंबित प्रकरणों की संख्या तेजी से बढ़ गई थी। इससे यह आभास हो रहा था कि वन अधिकारी कोई कार्यवाही नहीं कर रहे हैं। इसीलिये अब राज्य सरकार ने ऐसे मामलों को नस्तीबध्द करने का निर्णय लिया है।

राज्य सरकार ने नया प्रावधान जारी कर कहा है कि प्राकृतिक रुप से मृत पाये गये वन्यप्राणियों के संबंध में दर्ज प्रकरण जिसमें अज्ञात अपराधी का पता लगा पाना संभव न हो या प्रकरणों की जांच में कोई अपराध कारित न होना पाया जाये तो ऐसे प्रकरणों को नस्तीबध्द किया जा सकेगा। प्रकरण को नस्तीबध्द करने के  अधिकार क्षेत्रीय वन वृत्त के भरसाधक अधिकारी (सीसीएफ), क्षेत्र संचालक टाईगर रिजर्व, संचालक राष्ट्रीय उद्यान तथा क्षेत्रीय मुख्य महाप्रबंधक राज्य वन विकास निगम को अपने-अपने क्षेत्रों में होगा।

विभागीय अधिकारी ने बताया कि प्राकृतिक रुप से मरे वन्यप्राणियों के मामलों में पीओआर दर्ज होने से लंबित प्रकरणों की संख्या तेजी से बढ़ रही थी। इसीलिये ऐसे प्रकरणों को अब नस्तीबध्द किया जायेगा तथा इसके अधिकार चार स्तर के अधिकारियों को प्रदान कर दिये गये हैं।