चीते के बाद जंगली भैंसों को मध्य प्रदेश की धरती पर बसाने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए कान्हा टाइगर रिजर्व में भैंसों के लिए अनुकूल वातावरण खोजने की आवश्यकता होगी। यह जिम्मेदारी भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून को सौंपी गई है। संस्थान कान्हा पार्क के विभिन्न हिस्सों का अध्ययन करेगा और एक साल में वापस रिपोर्ट करेगा। इसके आधार पर असम से जंगली भैंसों को लाया जाएगा।

वन विभाग ने इस संबंध में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को प्रस्ताव भेजा है। गौरतलब है कि राज्य में 1979 के बाद से कोई जंगली भैंसा नहीं देखा गया है। आखिरी भैंस पन्ना के रायपुरा क्षेत्र के रूपजीर गांव के पास नजर आती है।

कई दशक पहले कान्हा टाइगर रिजर्व में जंगली भैंसों की मौजूदगी के साक्ष्य मिले हैं। इसलिए इस पार्क में भैंसों के जीवित रहने की अच्छी संभावना है। इसी वजह से कान्हा पार्क में ही पढ़ाई करने का फैसला किया गया है। पार्क का सुपारी क्षेत्र उनके लिए सुविधाजनक बताया जाता है। इसमें चारे और पानी की पर्याप्त आपूर्ति है। इस क्षेत्र में लगभग तीन किमी के दायरे में छोटे-छोटे जंगली घास के मैदान हैं।

सूत्रों ने बताया कि संस्थान ने अध्ययन शुरू कर दिया है। इसके साथ ही विभाग ने भैंस लाने की तैयारी भी शुरू कर दी है। छत्तीसगढ़ के उदयंती पार्क में 11 भैंस हैं और सरकार पहले भैंस उपलब्ध कराने को तैयार थी, लेकिन भैंस कम हैं। इसलिए मध्य प्रदेश इसे असम से लाने की कोशिश कर रहा है।

मध्य प्रदेश की भूमि पर जंगली भैंसों के पुनर्वास के प्रयासों के पीछे दो कारण हैं। सबसे पहले, राज्य अपने स्टेटस सिंबल (गौरव) को वापस लाने की कोशिश कर रहा है। दक्षिण अफ्रीका से तेंदुओं को लाने का यह भी एक कारण है, जबकि विचार इन जीवों को बचाने का है, जो वन्यजीवों की किसी अन्य लुप्तप्राय प्रजाति में शामिल हैं। इसी सोच के चलते एशियाई शेरों (बब्बर सिंह) को गुजरात के गिर अभयारण्य से मध्य प्रदेश लाया जाना था, लेकिन गुजरात सरकार शेर उपलब्ध कराने को तैयार नहीं है।