भोपाल: प्रदेश की शिवराज सरकार ने राज्य के सभी निजी एवं सरकारी मेडिकल एवं डेन्टल कॉलेजों में स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान कर दिया है। इसके लिये राज्य के तकनीकी शिक्षा विभाग ने मप्र चिकित्सा शिक्षा प्रवेश नियम 2018 में संशोधन कर दिया है। नये प्रावधानों के अनुसार, प्रदेश के सभी निजी एवं सरकारी चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालयों में अनुसूचित जाति को 16 प्रतिशत, अनुसूचित जनजाति को 20 प्रतिशत, ओबीसी वर्ग को पीजी कोर्स में 14 प्रतिशत तथा यूजी कोर्स में 27 प्रतिशत आरक्षण दिया है। आर्थिक रुप से कमजोर वर्ग को सिर्फ सरकारी मेडिकल एवं डेन्टल कॉलेज में 10 प्रतिशत का आरक्षण रहेगा।


हड़ताल करने पर प्रवेश निरस्त होगा :


नियमों में बदलाव के जरिये यह भी प्रावधान किया गया है कि मेडिकल एवं डेन्टल कॉलेजों में पाठ्यक्रम की अवधि में किसी भी समय अनुशासनहीनता, हड़ताल, पर जाने की स्थिति में, अनधिकृत रुप से अनुपस्थित रहने आदि गतिविधियों में लिप्त पाये जाने पर संबंधित कॉलेज के डीन/प्रचार्य द्वारा अनुशंसा किये जाने पर संचालक मेडिकल एजुकेशन द्वारा संबंधित छात्र-छात्रा का प्रवेश निरस्त किया जा सकेगा।
 

सेवारत को 30 प्रतिशत आरक्षण :


नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि कार्यरत पंजीकृत सेवारत अभ्यर्थी/चिकित्सा शिक्षा विभाग के अंतर्गत कार्यरत डिमांस्ट्रेटर/ट्यूटर/मेडिकल ऑफिसर को शासकीय एवं निजी मेडिकल एवं डेन्टल कॉलेजों की सीटों पर 30 प्रतिशत आरक्षण मिलेगा। इन्हें उक्त आरक्षण अनुसार ही सीटें मिल सकेंगी। अभ्यर्थी को नीट पीजी उत्तीर्ण होना अनिवार्य होगा तथा कोर्स करने के पश्चात पांच अनिवार्य रुप से सेवा देनी होगी तथा पांच साल सेवा न करने पर 50 लाख रुपये अदा करने का बाण्ड भरना होगा। नियमों में यह भी प्रावधान किया गया है कि अजा,जजा एवं ओबीसी के अभ्यर्थी न मिलने पर ईडब्ल्युएस वर्ग को सीटें दी जायेंगी तथा चारो वर्ग न मिलने पर अन रिजर्व केटेगरी के लोगों को ये सीटें दी जायेंगी।