सरकार ने कल ही लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता के रिक्त पद की कमान नरेंद्र कुमार को सौंप दी है, कुमार र को काविल इंजीनियर माना जाता है लेकिन उनके लिये यह पद कई 'बाहरी और अंदरूनी' परिस्थितियों में चुनौतीपूर्ण हो सकता है। वहीं कई ऐसे निर्माण विभाग हैं जो अपने नियमित मुखिया के बिना ही चल रहे हैं। 

कुछ महकमे ऐसे हैं जहां ईएनसी स्तर के अभियंता का काम मुख्य अभियंता यानि सीई या अधीक्षण अभियंता यानि एसई स्तर के अफसरों से कराया जा रहा है। निर्माण महकमे राजनीतिक जोर आजमाइश व आपसी खींचतान से भी त्रस्त हैं। जबकि ऐसे सभी निर्माण विभागों के लिये सरकार के पास कई बड़ी व महत्वाकांक्षी परियोजनाएं कागजों पर आकार ले चुकी हैं।

हालांकि यह हालात तत्काल पैदा नहीं हुए है। बल्कि सीनियर इंजीनियर्स के टोटे के लंबे समय से संकेत मिलते रहे है। मसलन इंजीनियरिंग के कामकाज की गुणवत्ता पर नजर रखने वाली संस्था सीटीई यानी मुख्य तकनीकी परीक्षक संगठन में सीई स्तर के अफसर गजोधर सुकैया कमान संभाले हैं, जबकि पहले यहां ईएनसी स्तर के अभियंता रहे हैं। जबकि इसी संगठन में अन्य निर्माण महकमों के सीई स्तर के पदों पर कार्यपालन यंत्री बैठाये गये हैं।

इसी तरह ग्रामीण यांत्रिकी यानि आरईएस में अधीक्षण स्तर के अभियंता श्रीवास्तव के पास ईएनसी जैसे पद की कमान है, उधर मंडी बोर्ड मे निर्माण का काम संभालने के वाले मुख्य अभियंता का पद दो साल से खाली है तथा अधीक्षण अभियंता के भी दो पद खाली हैं और आलम यह है कि इंदौर में पदस्थ ईई स्तर के अफसर को डबल चार्ज देने की मजबूरी है। मंडी में भी बड़े निर्माण कार्य होते हैं। इसी तरह नगरीय प्रशासन महकमे में ईएनसी स्तर का पद है जरूर लेकिन संविदा पर जीपी कटारे को रखना पड़ा है।

चार्ज देने के लिए भी अभियंताओं का टोटा:

मप्र के एनवीडीए में जल संसाधन विभाग से आये इंजीनियरिंग चीफ राजीव सुकलीकर मार्च में अपनी दूसरी संविदा अवधि पूरी कर रहे है। वहीं जल संसाधन महकमे के मुखिया ईएनसी एमएस डावर मार्च में रिटायर हो जायेंगे। 

यहां मुश्किल यह बताई कि महकमे के पास चीफ इंजीनियर स्तर के अभियंता तक नहीं बचे हैं जिन्हें चार्ज दिया जा सके, जो हैं वे अन्यत्र पदस्थ हैं और रिटायरमेंट के करीब भी। यानी यहां अधीक्षण स्तर के अभियंता को चार्ज देने का विकल्प होगा। 

उधर लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी महकमे के जल निगम के प्रमुख अभियंता स्तर के मुखिया एनपी मालवीय ने वीआरएस ले लिया है। यह प्रभार भी अभी किसी इंजीनियर को देना बाकी है। हालांकि यहां दो इस स्तर के इंजीनियर मौजूद हैं।