भोपाल।राज्य सरकार ने थर्ड जेण्डर को सामाजिक सुरक्षा दिये जाने के लिये नियम जारी कर दिये हैं। ये नियम 18 दिसम्बर 2021 के बाद पूरे प्रदेश में प्रभावशील हो जायेंगे। इसमें ऐसे थर्ड जेण्डर जो किसी बार में काम करते हैं और उनके पास वहाुं काम करने का परिचय-पत्र है, उन्हें भी थर्ड जेण्डर होने का सर्टिफिकेट दिया जायेगा।

उक्त नियम राज्य के सामाजिक न्याय विभाग ने केंद्र सरकार द्वारा दो साल पहले बनाये उभयलिंगी (थर्ड जेण्डर) व्यक्ति अधिकारों का संरक्षण अधिनियम 2019 के तहत बनाये हैं। नये जारी नियमों के तहत कोई भी थर्ड जेण्डर या तो ऑनलाईन या फिर ऑफलाईन आवेदन एसडीओ रेवेन्यु, तहसीलदार अथवा नायब तहसीलदार को पहचान-पत्र बनवाने का आवेदन कर सकेगा। आवेदन में उसे स्वप्रमाणित शपथ-पत्र में अपने लिंग की घोषणा करना होगी। जिला कलेक्टर आवेदन-पत्र के सत्यापन के बाद उसका पहचान-पत्र बनायेंगे।

नये नियमों में कहा गया है कि इन नियमों के लागू होने के बाद दो साल के अंदर राज्य सरकार थर्ड जेण्डर को सामाजिक सुरक्षा देने के प्रावधान एवं अधोसंरचनाओं जैसे पृथक शौचालय, आवास, अस्पतालों में पृथक वार्ड आदि को विकसित करेगी। निजी क्षेत्र के प्रतिष्ठानों को भी अपने यहां कार्यरत थर्ड जेण्डर को ये सुविधायें देनी होंगी। शैक्षणिक संस्थानों में थर्ड जेण्डर को धमकाने या उत्पीडि़त करने वाले पर कार्यवाही करने के लिये एक समिति बनाना होगी।

बनेंगे राज्य एवं जिला बोर्ड :
नये नियमों के तहत राज्य उभयलिंगी कल्याण बोर्ड सामाजिक न्याय मंत्री की अध्यक्षता में गठित किया जायेगा जबकि कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला उभयलिंगी कल्याण बोर्ड बनेंगे। इनमें थर्ड जेण्डर के लोग भी सदस्य रहेंगे। नियमों में थर्ड जेण्डर से भेदभाव के विरुध्द उपबंध में कहा गया है कि राज्य सरकार शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य देखभाल, सार्वजनिक परिवहन, जनजीवन में भागीदारी, खेलकूद, अवकाश और मनोरंजन तथा लोक या निजी पद धारण करने के अवसर सहित किसी सरकारी अथवा निजी संगठन अथवा प्रतिष्ठान में भेदभाव का प्रतिषेध करने के लिये पर्याप्त उपाय करेगी। नियमों में लिंग परिवर्तन कराने वाले थर्ड जेण्डर को भी सामाजिक सुरक्षा दिये जाने का उपबंध किया गया है। पीएचक्यु में डीजीपी के अधीन एक उभयलिंगी सुरक्षा सेल स्थापित करने का भी प्रावधान किया गया है।