भोपाल. प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ ने कहा कि उपचुनाव में एक तरफ भाजपा का संगठन, सरकार प्रशासन और पैसा था दूसरी तरफ मैं अकेला उनसे लड़ता रहा. मुझे एक हफ्ते पहले ही पता चल गया था कि विधायक सचिन बिरला भाजपा में जा रहे हैं. जाने की वजह भी पैसा रहा. मैं इस सिद्धांत के विपरीत हूं. पैसे की ताकत पर राजनीति नहीं करना चाहता.
शनिवार को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ से मुलाकात हुई. आधे घंटे से अधिक चली अनौपचारिक चर्चा के दौरान उनसे संगठन और 'मिशन-2023' के मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई. खंडवा लोक सभा और 3 विधानसभा उपचुनाव में हर जगह पर मुझे ही प्रचार के लिए बुलाया गया. हालांकि विकल्प के तौर पर दिग्विजय सिंह का भी नाम था. भाजपा संगठन सरकार प्रशासन और पैसा से अकेला लड़ता रहा. चुनाव प्रचार के दौरान महंगाई की वजह से जनता में भारी नाराजगी देखी गई. प्रचार में जहां-जहां मैं गया, वहां सबसे पहले मंडलम और सेक्टर के कार्यकर्ताओं से मिला. उनसे बूथ मैनेजमेंट पर चर्चा भी की. मतदान कम होने पर चिंता जाहिर की. उपचुनाव में भाजपा ने प्रशासन के दम पर गुंडागर्दी की है.
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* मैं जानता हूं कौन सजावट के हैं *
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने साफ कह दिया कि वह प्रदेश कार्यकारिणी के बदलाव के पक्ष में नहीं है. मैं मानता हूं कि प्रदेश कार्यकारिणी बहुत बड़ी है. अगर इसकी छोटी करते हैं तो कईयों को हटाना पड़ेगा. यानि किसी को हटाया जाता है तो वह नाराज होंगे. इसे नजरअंदाज किया जाए. मैं यह जानता हूं कि कौन काम के हैं और कौन सजावट के हैं.
*पैसे के लालच में जा रहे हैं विधायक*
क्यों भाजपा में जा रहे हैं विधायक, यह सवाल के जवाब में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बोले पैसा. पैसे के लालच में कांग्रेस के विधायक बीजेपी में जा रहे हैं. इसका खुलासा करते हुए कमलनाथ ने बताया कि यादव ने चुनाव लड़ने से मना कर दिया था तब मैंने सचिन बिरला को चुनाव लड़ने के लिए कहा. सचिन बिरला 2 दिन बाद गायब हो गया. मुझे बीजेपी के एक नेता से जानकारी मिली कि वह पार्टी ज्वाइन कर रहा है. यानी सचिन बिरला के जाने से एक हफ्ते पहले ही मुझे पता हो गया था. पहले भी जो गए वह पैसे के कारण गए. जो पैसे के दम पर जाते हैं तो मैं इसकी राजनीति नहीं करता. बीजेपी के पास अब बोलने लायक कुछ नहीं है, इसलिए वह पैसा प्रशासन और पुलिस के दम पर राजनीति करना चाहती.
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*'मिशन-2023' को लेकर क्या तैयारी है*
हमें बीजेपी के संगठन के खिलाफ चुनाव लड़ना है. राजनीति में बहुत बड़ा बदलाव आया है. चुनाव अब स्थानीय मुद्दे पर लड़ाई जाने लगे है. अगर आपका गांव में संगठन नहीं है तो आप चुनाव नहीं जीत सकते. पहले गांव के गांव कांग्रेसी हुआ करते थे पर आज एक घर नहीं कह सकते कि कांग्रेसी है. आज बाप-बेटे भाई भतीजे और चाचा-चाची अलग वोट देंगे. पहले 25 पर्सेंट लोग सोशल मीडिया से जुड़े थे और अब 90 प्रतिशत लोग सोशल मीडिया से जुड़े हैं. आज के मतदाता में ज्ञान बहुत है. मतदाता चुप रहता है. आखिरी समय में अपना मत बनाता है. ऐसे में जनता के बीच रहकर ही चुनाव जीत सकते हैं. इसके लिए हमने छिंदवाड़ा पैटर्न पर संगठन को मंडलम और सेक्टर तक ले जा रहे हैं. उन्हें ताकतवर बना रहे हैं, क्योंकि सेक्टर और मंडलम का पदाधिकारी ही गांव और मोहल्ले के लोगों से जुड़ा रहता है. 17 बूथ पर मंडलम और 3 से 6 बूथ पर सेक्टर का गठन किया जा रहा है. छिंदवाड़ा एकमात्र जिला है, जहां कांग्रेस के विधायक है.
*आप बंगले से संगठन चला रहे हैं*
इसका सहज भाव से उत्तर देते हुए कमलनाथ ने कहा कि मुझे पीसीसी में जाने और बैठने में कोई हर्ज नहीं है. अगर मैं पीसीसी जाता हूं और वहां किसी को समय दे रखा है तो मैं उनसे मीटिंग नहीं कर पाता हूं, क्योंकि उनके साथ 25-50 लोग और चले आते हैं. ऐसे में मैं उनसे कैसे बात कर सकता ? इसलिए जिनको समय दे रखा है अथवा जिनके साथ मीटिंग करना है उसके लिए बांग्ला ही उचित जगह है.