किसानों को गाड़ी से कुचलने के बहुचर्चित और विवादित लखीमपुर खीरी हिंसा कांड का पूरा सच शायद बहुत जल्द सामने आने वाला है। उम्मीद इसलिये भी प्रबल हैं क्योंकि सुप्रीम कोर्ट सीधे इस मामले पर नजर रखे हुए है। 

दो दिन पहले ही कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एक स्थिति रिपोर्ट पर निराशा व्यक्त की है। अदालत को लगता है कि जांच उस तरह से नहीं चल रही है, जैसी उसे खुद उम्मीद थी। इसमें कोई शक नहीं कि इस मामले में पुलिस को पूरी सतर्कता और तेजी के साथ कार्रवाई करनी पड़ेगी। क्योंकि अदालत की जो अपेक्षा है, उस पर खरा उतरने लिए जांच से जुड़े अधिकारियों को पूरी मुस्तैदी के साथ कार्रवाई करते हुए अदालत को आश्वस्त करना पड़ेगा। 

आला अधिकारियों को इसलिये भी सावधान रहना होगा, क्योंकि अदालत गवाहों की सूची और पूछताछ से संतुष्ट नहीं है। इतना ही नहीं, शीर्ष अदालत ने साफ कर दिया है कि वह जांच की निगरानी के लिए उत्तर प्रदेश से बाहर के एक उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश को नियुक्त करेगी। 

अब मामले की अगली सुनवाई दो दिन बाद यानी शुक्रवार को होगी, जिसमें पुलिस को बेहतर जवाबों के साथ सामने आना होगा। दरअसल अदालत ने कहा है कि साक्ष्यों के साथ घालमेल न इसलिए जांच की निगरानी के लिए वह पूर्व न्यायाधीश को नियुक्त करने को इच्छुक है। 

अदालत ने दो न्यायाधीशों के नाम भी सुझाए हैं। बहरहाल, अब सरकार की ओर से साफ हो गया है कि पत्रकार रमन कश्यप को किसानों ने नहीं मारा था, बल्कि घटना में शामिल वाहन द्वारा कुचले जाने से उनकी मौत हुई थी। पहले हमलावर किसानों पर यह आरोप था कि उन्होंने पत्रकार को मारा है। 

यूं तो लोकतंत्र में प्रदर्शन का लोगों को अधिकार है, लेकिन किसी तेज वाहन से ऐसे प्रदर्शन को निशाना बनाने को मंजूरी हम किसी भी पैमाने पर नहीं दे सकते। प्रदर्शनकारी किसानों पर गाड़ी चढ़ाने के लिए जो लोग जिम्मेदार हैं, उन्हें जल्द सजा मिलनी चाहिए। यह काम पुलिस जितनी मुस्तैदी से करेगी, उतना ही अच्छा होगा। हर रसूखदार को जनमानस के साथ ही कानून-कायदे का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए। 

अब भी कानून को सही अर्थों में लागू करके ही इस पूरे मामले का पटाक्षेप किया जा सकता है। जहा तक किसानों के आक्रोश का मामला है तो इसे समझने की जरूरत है। कोई भी ऐसी कार्रवाई या लीपापोती नहीं होनी चाहिए, जिससे किसानों को भड़कने का नया मौका मिले। बीते करीब एक साल में देश ने किसान आंदोलन के कई स्याह रूप देख लिए हैं। वहीं किसानों को भी कानून व्यवस्था के साथ व्यापक समाज के हित में सोचना चाहिए। उनका आंदोलन अपनी जगह है, लेकिन देश के माहौल को खराब करने के लिए कोई गलती नहीं होनी चाहिए। 

वैसे तो अच्छी बात है कि पुलिस ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा समेत कुछ अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर रखा है। यह अपने आप में बड़ी कार्रवाई है, लेकिन इस कार्रवाई को करने में भी पुलिस को कितने मोडों का सामना करना पड़ा होगा और कैसे मंत्री पुत्र को गिरफ्तार किया गया होगा, यह भी किसी रोमांचक कहानी से कम नहीं होगा। 

अब यदि असली दोषियों की पहचान और दंड का रास्ता खुलेगा 'तो निश्चित रूप से किसानों के जख्मों पर मरहम भी लगेगा हमारी व्यवस्था की मजबूती ही प्रकट होगी।