राजधानी दिल्ली में प्रदूषण से बिगड़ता माहौल थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने लोगों से बाहर न जाने को कहा है। बिना वजह बाहर जाने से बचने की सलाह दी। साथ ही गंभीर वायु प्रदूषण को देखते हुए सरकारी और निजी कार्यालयों को वाहनों के इस्तेमाल में कम से कम 30 फीसदी की कमी करने का निर्देश दिया गया।
Delhi | Air Quality Index (AQI) at 499 (overall) in the 'severe' category, as per SAFAR-India
— ANI (@ANI) November 13, 2021
Visuals from Connaught Place and Supreme Court pic.twitter.com/gqBksZ5uef
शनिवार सुबह दिल्ली की हवा का औसत एक्यूआई 499 था। जो कल से भी बदतर है। दरअसल राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार को इस सीजन में अब तक का सबसे खराब एक्यूआई रिकॉर्ड दर्ज किया गया। दिल्ली ने अपना 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 471 शाम 4 बजे दर्ज किया गया। गुरुवार को एक्यूआई 411 की सूचना मिली थी।
Air quality remains in 'severe category' in Ghaziabad today pic.twitter.com/TLqQTSgRX5
— ANI UP (@ANINewsUP) November 13, 2021
सीपीसीबी ने शुक्रवार को एक बैठक में कहा, "सरकारी और निजी कार्यालयों और अन्य संगठनों को वाहनों का इस्तेमाल बंद करने की सलाह दी जाती है।" कम से कम 30 प्रतिशत लोगों को बाहरी गतिविधियों को सीमित या कम करने की सलाह दी जाती है।
दिवाली के मौके पर आसपास के राज्यों में पराली जलाने और आतिशबाजी से राजधानी में प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ा है। शुक्रवार को दोनों इलाकों में वायु गुणवत्ता 700 से ऊपर दर्ज की गई। हालांकि, औसत आंकड़ा 360 है। इसके अलावा राजधानी के कई इलाकों कों रेड जोन में रखा गया है।
जानकारों के मुताबिक तत्काल कार्रवाई की जरूरत है। पिछले कई दिनों से दिल्ली की हवा में 'जहर' मिला हुआ है, जिससे लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषज्ञ रॉय चौधरी ने कहा कि दिल्ली की हवा में कोहरा एक सार्वजनिक प्रदूषण है।
इसके लिए कारों, उद्योगों, अपशिष्ट भस्मीकरण और निर्माण और सड़कों जैसे संसाधनों पर तत्काल आपातकालीन कार्रवाई की आवश्यकता है, ताकि प्रदूषण को और अधिक फैलने से रोका जा सके। प्रदूषण-स्रोत वाइस और हॉटस्पॉट वाइस स्टेटस पर भी काम करने की जरूरत है।
दिल्ली में कोहरा बहुत घना है। दिल्ली के हालात को लेकर विशेषज्ञ ने इसे आपात स्थिति और तत्काल कार्रवाई की जरूरत बताया। हवा की गुणवत्ता बिगड़ने से अस्पतालों में सांस और त्वचा संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या में इजाफा हुआ है।