लगातार चौथे साल ओवरऑल परफॉरमेंस के लिहाज से केरल टॉप पर रहा है। इस कैटिगरी में  उत्तरप्रदेश इस बार सबसे निचले स्थान पर है। चूंकि रिपोर्ट में राज्यों की इंक्रीमेंटल परफॉरमेंस भी देखी गई है और इस कसौटी पर केरल 12वें स्थान पर खिसका नजर आता है। इंक्रीमेंटल परफॉरमेंस यानी प्रदर्शन में सुधार के लिहाज से उत्तरप्रदेश देश में अव्वल है। 43 में से 33 मानकों पर उसकी स्थिति पहले की अपेक्षा बेहतर है। इस रिपोर्ट में बेस ईयर 2018-19 है और रेफरेंस ईयर 2019-20 यानि मतलब यह हुआ कि राज्यों में साल 2018-19 के मुकाबले 2019-20 की स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति को परखा गया है। केंद्र शासित क्षेत्रों की श्रेणी में उत्तरप्रदेश जैसी ही स्थिति दिल्ली की पाई गई है। ओवरऑल परफॉरमेंस के मामले में यह सबसे फिसड्डी क्षेत्रों में है, मगर इंक्रीमेंटल परफॉरमेंस यानी प्रदर्शन में सुधार की दृष्टि से सबसे अग्रणी क्षेत्रों में शामिल है। निश्चित रूप से उप्र और दिल्ली की मौजूदा सरकारें प्रदर्शन में सुधार का श्रेय ले तो भी इसमें कुछ गलत भी नहीं है। लेकिन राज्यों में तुलना के सीमित नजरिए से थोडा हटकर देखा जाए तो पूरे देश की स्थिति खास संतोषजनक नहीं कही जा सकती। उदाहरण के लिए, सभी बड़े राज्यों के जिला अस्पतालों में स्पेशलिस्टों की कमी पाई गई है। यह जरूर है कि कुछ राज्यों में यह कमी नगण्य कही जा सकती है, जैसे राजस्थान में 2 फीसदी मगर मध्यप्रदेश जैसे राज्य भी हैं, जहां 58 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। मप्र भी उन राज्यों में शामिल हैं जहां सरकारी अस्पतालों में से डाक्टर्स और पैरामेडिकल स्फाफ की सख्त कमी बरसों से महसूस की जा रही है। इसी तरह आधे राज्य ऐसे हैं, जहां राज्य सरकार के कुल खर्च में से स्वास्थ्य के मद में किए गए खर्च का अनुपात कम हुआ है। स्वाभाविक रूप से खर्च में कमी का असर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। इसलिए यह देखा जाना चाहिए कि विभिन्ना राज्यों में इस कमी की किसी और तरीके से भरपाई की कोशिशें भी हो रही हैं या नहीं। गौरतलब बात यह भी है कि यह रिपोर्ट जारी भले अब की गई हो, लेकिन इसमें कोरोना महामारी का दौर कवर नहीं हुआ है। कोरोना के दौर में स्वास्थ्य सेवाओं की क्या क्षमता थी, उसके सामने किस तरह की चुनौतियां आईं और इसका अलग से अध्ययन किए जाने की सख्त जरूरत है। लेकिन यह रिपोर्ट भी इतना तो स्पष्ट कर ही देती है कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति में सुधार की कोशिशें लगातार जारी रहनी चाहिए। वैसे देखा गया है कि कोरोना के आक्रमण के बाद सरकारों का फोकस स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतरी लाने पर बढा है। केंद्र सरकार भी इसमें राज्यों को हिदायतें दे रही है तथा मदद भी। यदि सरकारी स्वास्थ्य अधोसंरचना बेहतर बनी हैं या बनने की प्रक्रिया में हैं तो माना जाना चाहिये कि हम स्वस्थ समाज की ओर बढ़ेंगे।