सोशल मीडिया का इस्तेमाल, टीवी देखना और कंप्यूटर यूज करने से किशोरों में ऐंग्जाइटी के लक्षण बढ़ रहे हैं, यह बात एक स्टडी में सामने आई है। कनेडियन जर्नल ऑफ साइकायट्री में छपी रिसर्च के मुताबिक, अगर आप 4 साल से ज्यादा सोशल मीडिया, टीवी और कंप्यूटर पर ज्यादा वक्त गुजारते हैं तो इस दौरान ऐंग्जाइटी के लक्षण ज्यादा दिखते हैं। बच्चे आज से नहीं कई साल से सोशल मीडिया के एडिट हो चुके हैं बिना मोबाइल की वह रह नहीं सकते और वह मोबाइल की इतनी इज्जत करते हैं कि मां-बाप उन्हें मोबाइल दे ही देते हैं और यह लत बढ़ती चली जाती है वह क्या देख रहे हैं क्या कर रहे हैं किस तरह से मोबाइल का उपयोग कर रहे हैं यह मां-बाप जान ही नहीं सकते क्योंकि मां-बाप से ज्यादा होशियार तो बच्चे  होते हैं टेलीविजन का इस्तेमाल भी बच्चों को मनोरोगी बना रहा है रिसर्च  में पाया गया कि जब टीवी, सोशल मीडिया और कंप्यूटर का इस्तेमाल कर दिया गया तो उनके ऐंग्जाइटी के लक्षणों में कमी देखी गई।

कनाडा की मॉन्ट्रियल यूनिवर्सिटी की रीसेंट स्टडी में टीम ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल और टीवी देखने से डिप्रेशन का कनेक्शन देखा। हालांकि स्टडी में कंप्यूटर के इस्तेमाल से यह कनेक्शन नहीं मिला। इससे यह बात सामने आई कि कंप्यूटर का इस्तेमाल सिर्फ ऐंग्जाइटी बढ़ाता है। किशोर ज्यादातर होमवर्क करने के लिए इसका इस्तेमाल करते हैं। इस रिसर्च  के नतीजों से लोग बच्चों के स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण कर सकते हैं ताकि उनमें ऐंग्जाइटी के लक्षण न बढ़ें। जागने पर मोबाइल चेक करने की आदत छोड़ना बेहतर मोबाइल लोगों की जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। विडियो देखने हों, गाने सुनने हों, गेम्स खेलना हो या फिर अलार्म ही लगाना हो, इस सबके लिए मोबाइल का इस्तेमाल किया जाता है।

यही वजह है कि सोने से पहले और जागने के बाद ज्यादातर लोग अपने स्मार्टफोन को यूज करते हैं। रात के अंधेरे में मोबाइल यूज करने के इस्तेमाल के नुकसान के बारे में तो आप जानते ही होंगे, लेकिन क्या आपको पता है कि सुबह उठकर सबसे पहले स्मार्टफोन को चेक करना भी सेहत के लिए अच्छा नहीं है। यूके में करीब 2000 लोगों पर हुए एक सर्वे के मुताबिक, सुबह जागते ही सबसे पहले मोबाइल चेक करने पर दिन की शुरुआत ही स्ट्रेस से होती है, जो दिमाग के वर्किंग प्रोसेस पर असर डालते हुए कार्यक्षमता पर असर डालता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जब व्यक्ति जागने पर सबसे पहले मोबाइल पर मेल या नोटिफिकेशन चेक करता है तो उसका दिमाग उनसे जुड़े विचारों से ही भर जाता है, जिससे वह किसी अन्य चीज के बारे में बेहतर तरीके से नहीं सोच पाता। उठने के बाद एक ही चीज के बारे में सोचते रहने के कारण स्ट्रेस और ऐंग्जाइटी लेवल बढ़ जाता है।

सुबह के समय वैसे ही बीपी बढ़ा हुआ होता है ऐसे में तनाव उसे और बढ़ा सकता है जो खतरनाक साबित होगा। सोने के बाद अगले दिन उठने पर जब व्यक्ति मेल या नोटिफिकेशन चेक करता है तो वह बीते हुए दिन की घटनाओं से संबंधित जानकारी पढ़ रहा होता है। एक्सपर्ट की मानें तो इसका असर यह होता है कि व्यक्ति के प्रेजेंट को पास्ट हाइजैक कर लेता है और नए दिन को नए तरीके से जीने की जगह वह बीते हुए दिन के मुताबिक ही उसे जीता है। एक सर्वे में सामने आया है कि जागने के बाद सबसे पहले मोबाइल चेक करना और पास्ट इवेंट्स को लेकर सोचने के कारण एकाग्रता में भी कमी आती है। इसका असर ड्राइविंग से लेकर ऑफिस में काम करने और पढ़ाई करने तक में दिखाई देता है।