नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने स्किन टू स्किन टच पर बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया है. अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट से फैसले को रद्द करने की अपील की थी. महिला आयोग ने भी बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देते हुए एक विशेष याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने आज फैसला सुनाया कि पॉक्सो अधिनियम के तहत त्वचा से त्वचा के संपर्क के लिए स्पर्श और शारीरिक संपर्क के अर्थ को सीमित करना पॉक्सो अधिनियम की परिभाषा को और सीमित कर देगा.
Supreme Court sets aside the Bombay High Court judgment that held that groping a minor's breast without "skin to skin contact" can't be termed as sexual assault as defined under the Protection of Children from Sexual Offences (POCSO) Act. pic.twitter.com/1tBO6vbbNU
— ANI (@ANI) November 18, 2021
इससे पहले मुंबई हाई कोर्ट ने कहा था कि अगर किसी नाबालिग के आंतरिक अंगों को बिना कपड़े हटाए छू लिया जाए तो इसे यौन उत्पीड़न नहीं कहा जा सकता. यह यौन शोषण की परिभाषा में नहीं आता. इस मामले में एक 39 वर्षीय व्यक्ति को 12 साल की बच्ची का यौन शोषण करने के आरोप में तीन साल जेल की सजा सुनाई गई थी, जिसके खिलाफ उसने उच्च न्यायालय में अपील की थी. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि गलत नीयत से बच्चे को कपड़े के ऊपर से छूना भी POCSO एक्ट का ही मामला है.
हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई, जिसने 27 जनवरी को हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी. अधिकार दांव पर था, क्योंकि पॉक्सो एक्ट में कहा गया है कि नाबालिग के शरीर या स्तनों के निजी हिस्से को छूने वाला कोई भी व्यक्ति यौन हमलावर माना जाएगा.