भोपाल। राज्य सरकार ने टाउन एण्ड कन्ट्री प्लानिंग के अंतर्गत लैंड यूज बदलने के संबंध में नई सुविधा प्रदान की है। यदि किसी व्यक्ति ने लैंड यूज बदलने का आवेदन दिया है और इस बीच मास्टर प्लान में अपेक्षित लैंड यूज का प्रावधान हो जाता है तो उस आवेदन को नस्तीबध्द कर दिया जायेगा तथा आवेदक से कोई चार्ज भी नहीं वसूल किया जायेगा। इसके लिये नौ साल पहले बने नगर तथा ग्राम निवेश नियम 2012 में बदलाव किया गया है।

नगरीय विकास एवं आवास विभाग के उप सचिव शुभाशीष बैनर्जी ने इस संबंध में उदाहरण देते हुये बताया कि यदि किसी व्यक्ति ने अपनी भूमि को कृषि से आवासीय में बदलने के लिये आवेदन दिया है और इस बीच मास्टर प्लान में आवेदक की भूमि आवासीय घोषित हो जाती है तो इस आवेदन को नस्तीबध्द कर दिया जायेगा और उससे कोई चार्ज नहीं वसूला जायेगा क्योंकि मास्टर प्लान में उसकी भूमि का लैंड यूज अपेक्षा अनुसार हो गया है तथा उसे दोबारा आवेदन नहीं करना होगा। लेकिन उन लैंड यूज के आवेदन-पत्रों पर कार्यवाही जारी रहेगी जिनके अपेक्षित लैंड यूज मास्टर प्लान में नहीं आये हैं।

भूतल पर अब आवास हो सकेगा :
राज्य सरकार ने दूसरा नया प्रावधान यह भी लागू कर दिया गया है कि अब भूतल में आवास योग्य क्षेत्र की अनुमति दी जा सकेगी तथा यह एफएआर में संगणित किया जा सकेगा। उदाहरणार्थ यदि भूतल के आगे एवं पीछे रोड निकल रही है तो पीछे वाले हिस्से में आवास योग्य क्षेत्र की अनुमति दी जा सकेगी तथा सामने वाले हिस्से में पार्किंग की व्यवस्था रहेगी।

इसी प्रकार, अब आवासीय उपयोग वाले परिसर में एफएआर से छूट प्राप्त क्षेत्र का योग 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा जबकि समूह आवासीय योजना में 35 प्रतिशत से अधिक नहीं होगा। वाणिज्यिक उपयोग वाले परिसरों में 20 प्रतिशत से अधिक नहीं हो सकेगा। टंकियों, रैम्प, मम्टी, सीढ़ी एवं पार्किंग क्षेत्र को एफएआर की गणना से छूट रहेगी।