भोपाल। राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा आने वाले समय में त्रिस्तरीय नगरीय निकायों में नगर निगम के मेयर और नगर पालिका एवं नगर परिषद के अध्यक्ष पद के चुनाव प्रत्यक्ष पध्दति यानि जनता के सीधे वोट द्वारा नहीं कराये जायेंगे बल्कि पार्षदों में से इनका चयन बहुमत के आधार पर होगा। यह स्थिति साफ हुई है, आयोग द्वारा तीनों नगरीय निकायों में पार्षदों के मुक्त चुनाव चिन्ह जारी करने से।

दरअसल पिछली कमलनाथ सरकार ने मेयर एवं अध्यक्ष के चुनाव प्रत्यक्ष पध्दति से कराने का प्रावधान हटा दिया था और 2 नवम्बर 2019 को सिर्फ पार्षदों के चुनाव प्रत्यक्ष पध्दति से कराने के लिये 69 मुक्त चुनाव चिन्ह आयोग के माध्यम से जारी किये थे। इसके बाद मार्च 2020 में पुन: भाजपा की शिवराज सरकार के आने पर इनके चुनाव प्रत्यक्ष पध्दति से कराने का निर्णय लिया और 12 अक्टूबर 2020 को मेर एवं अध्यक्ष के 37 तथा पार्षदों के लिये 31 मुक्त चुनाव चिन्ह जारी किये। लेकिन अब इन चुनाव चिन्हों की अधिसूचना निरस्त कर उसने सिर्फ पार्षदों के लिये कुल 68 मुक्त चुनाव चिन्ह जारी कर दिये हैं। इसमें मेयर एवं अध्यक्ष के चुनाव लडऩे वालों के लिये कोई चुनाव चिन्ह नहीं रखा गया है।

ऐसे चला क्रम :

पिछली कमलनाथ सरकार ने 27 जनवरी 2020 को मेयर एवं अध्यक्ष के चुनाव अप्रत्यक्ष पध्दति से कराने का कानून प्रभावशील किया। इसके बाद मार्च 2020 में शिवराज सरकार के आने पर 26 सितम्बर 2020 को अध्यादेश जारी कर पुन: मेयर एवं अध्यक्ष के चुनाव प्रत्यक्ष पध्दति से कराने का कानून लागू किया परन्तु यह छह माह बाद अप्रभावशील हो गया क्योंकि अध्यादेश के लागू रहने की अवधि छह माह ही रहती है। इस अध्यादेश के प्रावधानों को स्थाई करने के लिये 24 फरवरी 2021 को विधानसभा में विधेयक तो पेश किया परन्तु इसे पारित नहीं कराया गया। इससे कमलनाथ सरकार के समय 27 जनवरी 2020 को प्रभावशील कानून लागू हो गया जिसमें मेयर एवं अध्यक्ष के चुनाव अप्रत्यक्ष पध्दति से कराये जाने का प्रावधान है। इसी कानून का उपयोग कर अब राज्य निर्वाचन आयोग ने पार्षदों में से ही मेयर एवं अध्यक्ष का चुनाव कराने की व्यवस्था लागू कर दी है।