भोपाल. मंत्रालय कर्मचारी संघ की पूर्व कार्यकारिणी दो निर्वाचन अधिकारी नियुक्त कर अपने ही जाल में फंस गई है। पहले नियुक्त निर्वाचन अधिकारी द्वारा निर्विरोध चुनाव कराए गए हैं। जिसके तहत सुभाष वर्मा अध्यक्ष बन गए हैं। सुभाष की आपत्ति थी कि नवीन कार्यकारिणी को मंत्रालय कर्मचारी संघ की पुरानी कार्यकारिणी दफ्तर की जाबी व दस्तावेज नहीं सौंप रही है। इस आपत्ति को शासन ने गंभीरता से लेते हुए चुनाव कार्यालय को गुरुवार सील कर दिया है। पुरानी कार्यकारिणी से हिसाब मांगा है। साथ ही सभी जरूरी दस्तावेज भी मांगे हैं। इन दस्तावेजों के साथ पुरानी कार्यकारिणी के कर्ताधर्ताओं को 8 दिसंबर को सुबह 10.30 बजे जांच में शामिल होने के लिए बुलाया है।
शासन की इस कार्यवाही के बाद पुरानी कार्यकारिणी द्वारा दूसरे निर्वाचन अधिकारी भगवान सिंह द्वारा दूसरा समांतर चुनाव कराने की कार्यवाही पर ग्रहण लगता नजर आ रहा है, क्योंकि चुनाव के पूर्व शासन ने पुरानी कार्यकारिणी से सदस्यता पंजी, वसूला गया सदस्यता शुल्क की जाने वाली कार्यवाही विवरण की नस्ती, संघ के प्रमाण पत्र, संघ की चल और अचल संपत्ति समेत सभी मांग लिए हैं। कार्यालय पर भी ताला जड़ दिया है। ऐसे में 14 दिसंबर को प्रस्तावित पुरानी कार्यकारिणी द्वारा कराए जाने वाले चुनाव मुश्किल में पड़ गए हैं।
सुभाष वर्मा गुट की कार्यकारिणी 22 नवंबर को मंत्रालय कर्मचारी संघ पर काबिज हुई है। कर्मचारी नेताओं की माने तो मंत्रालय कर्मचारी के इतिहास में पहली बार शासन ने उनके दफ्तर पर ताल जड़ा है। पहले कभी ऐसी कार्रवाई नहीं की गई थी। मंत्रालय कर्मचारी संघ का एकतरफा दबाव था। शासन भी संघ की प्रत्येक बातें सुनता था। अभी भी सुनवाई हो रही है लेकिन पुरानी कार्यकारिणी की जगह नई कार्यकारिणी से शासन के अधिकारी बात कर रहे हैं। कर्मचारी नेताओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विवाद की स्थिति के लिए पुरानी कार्यकारिणी ही जिम्मेदार है। यदि पुरानी कार्यकारिणी चुनाव के लिए दो चुनाव अधिकारी नियुक्त नहीं करती तो विवाद की स्थिति ही पैदा नहीं होती। दो चुनाव अधिकारी नियुक्त करके कार्यकारिणों के जिम्मेदार पदाधिकारियों ने ही विवाद को जन्म दिया है। अब पुरानी कार्यकारिणी दबे जुबान में बात कर रही है पूर्व में नई कार्यकारिणी की चुनाव प्रक्रिया के अवैध ठहरा रही थी।
अध्यक्ष सुभाष वर्मा का कहना है कि सुधीर नायक जो कि पहले इस्तीफा और संन्यास की घोषणा कर चुके है और आशीष सोनी को दैनदिनी कार्यों का कार्यभार सौंप चुके है। अस्तित्व विहीन कार्यकारिणी द्वारा संघ के वल्लभ भवन स्थित कार्यालय एवं पार्किंग स्थल स्थित कार्यालय की चाबी नहीं सौंपी जा रही थी। सुधीर नायक, आशीष सोनी और आलोक वर्मा द्वारा उपरोक्त निर्वाचन होने के बाद भी संघ को विवादित करने की दृष्टि से समानांतर निर्वाचन की प्रक्रिया अपनाई जा रही है जिसको विधान विरुद्ध बताए हुए उच्च स्तर पर लिखित शिकायत दर्ज की थी।
सामान्य प्रशासन द्वारा शिकायत पर संज्ञान लेते हुए संघ कार्यालय को सुरक्षा अधिकारी मंत्रालय के आधिपत्य में लेने के लिए आदेश जारी कर दिए है। जिसके पालन में सुरक्षा अधिकारी के द्वारा संघ के वल्लभ भवन एवं पार्किंग स्थल स्थित कार्यालय को अपने अधिपत्य में ले लिया है।
अध्यक्ष वर्मा की सुभाष चंद बोस पैनल द्वारा मार्च 2021 में की गई शिकायत पर पंजीयक फर्म्स एवं संस्था को तीन दिन में जांच कर रिपोर्ट देने के सामान्य प्रशासन विभाग के उच्च अधिकारी द्वारा दिये है एवं इस बात पर अप्रसन्नताव्यक्त की गई कि 09 माह पूर्व सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा पत्र लिखने के बाद भी जांच क्यों नहीं की गई।
उपरोक्त निर्देश के पालन में जांच अधिकारी शसंजय सीठा ने 08 दिसम्बर 2021 को होने वाली जांच को दिनांक 02 दिसम्बर 2021 को ही करने तथा संघ से समस्त रिकार्ड उपलब्ध कराने हेतु पत्र जारी किया गया।
उक्त जांच के लिए जांचकर्ता अधिकारी संजय सीठा ने उपस्थित होकर जांच के लिए भेजी गई प्रश्नावली के तहत सुधीर नायक एवं उनकी कार्यकारिणी से लिखित में जवाब मांगा है। 09 बिंदु पर की जा रही जांच पर कोई सन्तोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं कर सके तथा उत्तर प्रस्तुत करने के लिए शाम तक का समय मांगा गया था।