भोपाल- सरकारी महकमों में कर्मचारियों और अधिकारियों के गायब हो जाने या नाफरमानी का सिलसिला पुराना है। अक्सर स्कूल शिक्षा महकमा हो या स्वास्थ्य विभाग, यह महमके अपने शिक्षक या डॉक्टर को बिना कारण बताए ड्यूटी पर गैरहाजिर रहने पर ढूंढते ही रहते हैं।
लेकिन राज्य सेवाओं के ऐसे लापरवाह अमले के साथ ही यह अखिल भारतीय सेवाओं के अफसर भी कदमताल करने लगे हैं। मसलन वन विभाग में पदस्थ भारतीय वन सेवा के एक अफसर नदारद हैं तो कुछ ऐसे हैं जो आदेशों का पालन नहीं कर रहे हैं लेकिन इन पर कार्रवाई में आला अफसरों के हाथ पांव फूल रहे हैं। चूंकि यह अभा सेवा के अफसर हैं और रसूखदार भी, लिहाजा सरकार बेबस है।
बताया जाता है कि इन पर नियमानुसार कार्रवाई में शीर्ष अधिकारी भी हिचकिचा रहे हैं। इनमें 1987 बैच के आईएफएस अफसर अजीत श्रीवास्तव, 1994 बैच के आईएफएस बी एस होतगी तथा 1996 बैच के चर्चित आईएफएस एम काली दुरई सहित आधा दर्जन आईएफएस के नाम शामिल हैं।
हालांकि इस दाग के चलते इन्हें प्रमोशन भी नहीं मिल रहा है। दरअसल, काली दुरई को जनवरी 2023 में रिटायर होना है मगर वे सितंबर 2020 से भूमिगत हो गए है। यहां तक कि अधिकारी भी चाह कर भी उनसे बातचीत नहीं कर पा रहे हैं। प्रधान मुख्य वन संरक्षक मुख्यालय के अफसरों को उनके बारे में कोई अता पता नहीं है।
मुख्यालय में उनकी पदस्थापना समन्वय शाखा में है। जब प्रतिनियुक्ति पर काली दुर्रई उद्यानिकी संचालक थे. तब उनके कार्यकाल में शीतगृह निर्माण के लिए एक कंपनी एवं पॉलीहाउस निर्माण, स्प्रिंकलर के लिए किसानों को दिए अनुदान में कथित गड़बड़ी हुई थी।
प्रारंभिक जांच में काली दुर्रई को जिम्मेदार ठहराया गया और 23 जनवरी 2021 को उनको आरोप पत्र जारी किया गया। चर्चा है कि भाजपा के दक्षिण भारतीय नेताओं के जरिए काली दुरई मुख्यमंत्री पर कार्रवाई न किए जाने के लिए सिफारिश करवा रहे हैं।
आदेशों के पालन में कोताही:
इसी तरह व्हीएस होतगी का भी मामला है। वे कुछ समय पहले गायब हो गये थे। अब वे लौटे हैं मगर विवाद उनके साथ हैं। होतगी को नवंबर 2025 में सेवानिवृत्त होना है। इसका ट्रैक रिकार्ड अत्यंत खराब होने की वजह से राज्य सरकार ने पिछले वर्ष बर्खास्तगी करने का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा था।
मगर केंद्र ने राज्य सरकार के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। खास बात यह है कि 94 के बैच के सभी आईएफएस अफसर अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक पद पर प्रमोट हो गए हैं किंतु होतगी अभी भी डीएफओ के पद है। अगस्त 21 में राज्य शासन ने होतगी का स्थानांतरण भिंड से भोपाल प्रधान मुख्य वन संरक्षक का कार्यालय में कर दिया है परंतु अभी तक विभाग के अधिकारी आदेश का पालन नहीं करा पा रहे हैं। प्रभार देने के लिए अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रशासन राकेश कुमार यादव दो पत्र लिख चुके हैं।
अफसर नाराज मगर खुद बेअसर:
अजीत श्रीवास्तव अगस्त 2023 में सेवानिवृत्त होंगे। वे 55 लाख रुपए की रिश्वत मांगने संबंधित ऑडियो वायरल के चलते पीसीसीएफ के पद पर प्रमोट नहीं हो सके हैं। प्रमोशन का मामला कैट में लंबित है। मुख्य सचिव को पार्टी बनाए जाने से उनसे इकबाल सिंह बैंस और प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल नाराज चल रहे हैं।
राजनीतिक रसूख के चलते उन्होंने आरक्षण शाखा में पोस्टिंग करा रखी है। ऑडियो वायरल मामले में कसूरवार पाए जाने पर सरकार ने श्रीवास्तव का इंक्रीमेंट रोक रखा है।