भोपाल: प्रदेश की गृह निर्माण सहकारी समितियों की भूमि सिर्फ सहकारिता रजिस्ट्रार की अनुमति से ही बेची जा सकेगी। जिलों में पदस्थ संयुक्त एवं उप सहकारिता आयुक्तों को यह अनुमति देने का अधिकार नहीं होगा।

राज्य के सहकारिता आयुक्त एवं रजिस्ट्रार नरेश पाल ने इस संबंध में सभी नगर निगम आयुक्तों तथा टीएनसीपी के के संयुक्त संचालकों को पत्र जारी कर कहा है कि मप्र सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 के अध्याय 8-की धारा 72 (बी/ख) के तहत रजिस्ट्रार की अनुमति के बिना सोसायटी द्वारा धारित भूमि या उसका कोई भाग नहीं बेचा जाएगा या पटटे पर नहीं दिया जायेगा और ऐसी भूमि के अंतरण की कोई कार्यवाही नही की जायेगी। रजिस्ट्रार कार्यालय के संज्ञान में ऐसे प्रकरण प्रकाश में आये हैं, जिनमें गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं के द्वारा अवैधानिक रूप से संस्था की भूमि का विक्रय और अंतरण बिना रजिस्ट्रार की अनुमति के किया गया है तथा क्रेता नामांतरण, अभिन्यास स्वीकृति तथा विकास की अनुमति हेतु सीधे स्वयं अथवा संबंधित निकाय के माध्यम से संबंधित जिले के संयुक्त/उप/सहायक पंजीयक सहकारी संस्थाओं से अनापत्ती प्राप्त कर संस्था की भूमि का विक्रय करने का प्रयास किया गया है। यह स्पष्ट किया जाता है कि सहकारी अधिनियम की धारा 72 बी के अधिकारों का प्रत्यायोजन किसी भी अधीनस्थ अधिकारी को नहीं है अर्थात सहकारी अधिनियम की धारा 72(बी) की समस्त शक्तियां एक मात्र रजिस्ट्रार में निहित है।

पत्र में आगे कहा गया है कि गृह निर्माण सहकारी संस्थाओं को भूमि विक्रय तथा सहकारी संस्थाओं से क्रय की गई भूमि का नामांतरण/विकास अनुमति नगर एवं ग्राम निवेश से अभिन्यास की स्वीकृत के लिये वर्तमान में जो अभिमत सहकारिता विभाग के संभाग/जिले में पदस्थ संयुक्त/उप पंजीयक से लिये जाते हैं, वे वैधानिक नहीं हैं। यदि वर्तमान में कोई प्रकरण लंबित हो या भविष्य में प्राप्त हो तो ऐसे प्रकरण रजिस्ट्रार को भेजे जावें। उक्त कार्यवाही हतु एक मात्र रजिस्ट्रार ही वैधानिक रूप से अधिकृत है। इस संबंध में संयुक्त /उप/सहायक पंजीयक को किसी भी प्रकार के अधिकार प्राप्त नहीं है। यदि किसी प्रकरण में पूर्व से संयुक्त/उप/सहायक आयुक्त सहकारिता द्वारा अनापत्ति प्रदान की गई है, तो उसे अधिकारिता विहीन होने से शून्य माना जाये।