मध्य प्रदेश में इन दिनों काम के साथ-साथ नाम बदलने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। मांग भोपाल के ईदगाह हिल्स से की गई लेकिन हबीबगंज स्टेशन से शुरू हुई। अब सूची आगे बढ़ती है। हर दिन नए नाम जुड़ रहे हैं। जिसमें भोपाल के मिंटो हॉल और राज्य के सबसे बड़ा शहर इंदौर का नाम शामिल हो गया है।
एमपी में नाम बदलने की राजनीति ट्रेन की तरह शुरू हो गई है। भोपाल के हबीबगंज स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति कर दिया गया है। इंदौर के पातालपानी स्टेशन, बस स्टैंड और चौराहे का नाम बदलकर तांत्या भील के नाम पर किया जा रहा है। जिसके बाद भोपाल में मिंटो हॉल के नाम से जानी जाने वाली पुरानी विधानसभा का नाम बदलने की मांग की गई है। वहीं इंदौर का नाम भी चर्चा में आ गया है।
भाजपा राज्य मंत्री रजनीश अग्रवाल ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह से मिंटो हॉल का नाम डॉ. हरिसिंह गौर के नाम से बदलने का आग्रह किया है। देश 26 नवंबर को संविधान दिवस के रूप में मनाता है और उसी दिन डॉ. हरिसिंह गौर की जयंती भी मनाई जाती है। यह नामकरण उन लोगों के लिए प्रेरणा का काम करेगा जो शिक्षा, साहित्य, कानून और सामाजिक सरोकारों पर सार्थक रूप से काम करते हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता नरेंद्र सलूजा ने कहा, "हम आजादी की 75वीं वर्षगांठ मना रहे हैं।" गुलामी के प्रतीक भोपाल मिंटो हॉल का नाम मामा तांत्या भील के नाम पर रखा जाए। यह उनके बलिदान के दिन एक सच्चा उपहार होगा। वहां आज से भाजपा कार्यसमिति की बैठक हो रही है। इसमें यह प्रस्ताव भी पारित होना चाहिए।
सीएम शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर में भंवरकुआं चौराहे, बस स्टैंड, पातालपानी रेलवे स्टेशन का नाम तांत्या मामा भील और मानपुर स्वास्थ्य केंद्र का नाम तांत्या मामा भील के नाम पर रखने की घोषणा की। इसके बाद कई शहरों का नामकरण किया गया। उज्जैन के सांसद अनिल फिरोजिया ने मांग की थी कि फतेहाबाद का नाम बदलकर चंद्रावतीगंज किया जाए, जबकि अब प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर का नाम बदलने की मांग की जा रही है।
राज्य सरकार में नगरीय प्रशासन मंत्री भूपेंद्र सिंह ने इंदौर का नाम माता अहिल्याबाई होल्कर के नाम पर रखने का समर्थन किया था। जिसके बाद बीजेपी के कई नेता भूपेंद्र सिंह के समर्थन में उतर आए। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता उमेश शर्मा ने कहा कि मां अहिल्याबाई होल्कर शिव की भक्त थीं और मां नर्मदा की भक्त थीं। उन्होंने पूरे देश में शिव मंदिरों का निर्माण किया, घाटों, नदियों, झीलों और नदियों पर सराय का निर्माण किया। वह हमेशा जनसेवा का काम करती थीं। इंदौर पर उनका आशीर्वाद है कि आज भी इस शहर में कोई भूखा नहीं सोता। इसलिए शहर का नाम बदलने में कोई हर्ज नहीं है।
इंदौर का नाम बदलने के प्रस्ताव का कांग्रेस भी स्वागत कर रही है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता नीलाभ शुक्ला ने कहा कि इंदौर का नाम देवी अहिल्याबाई के नाम पर रखने का कांग्रेस स्वागत करती है, लेकिन इंदौर में उसी तरह का सुशासन होना चाहिए, जैसे देवी अहिल्या माता सुशासन की पर्याय थीं। सरकार को पहले शहर की सड़कों, बेतरतीब ट्रैफिक व्यवस्था, अपराध और महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों पर नियंत्रण करना चाहिए। फिर नाम बदलने पर विचार करें, तभी सरकार की मंशा सही मानी जाएगी।
इससे पहले भी इंदौर का नाम बदलकर इंदौर करने की मांग उठी थी। पहले इस शहर का नाम केवल इंडोर था। ब्रिटिश शासन के दौरान इसका नाम बदलकर इंदौर कर दिया गया। लेकिन अब मां अहिल्याबाई के नाम पर इसका नाम रखने की एक नई मांग उठ खड़ी हुई है।