भोपाल: मप्र विधानसभा में उपाध्यक्ष का पद पिछले डेढ़ साल से खाली पड़ा हुआ है। इसका मूल कारण पिछली कमलनाथ सरकार द्वारा उपाध्यक्ष पद विपक्ष को न देकर अपनी ही पार्टी के विधायक को देना है। वर्तमान में सत्तारुढ़ भाजपा ने भी इसी कारण से विपक्षी दल कांग्रेस को यह पद नहीं दिया है लेकिन उसने इस पर अपनी पार्टी के किसी विधायक को भी नहीं नवाजा है। फिलहाल विधानसभा का संचालन स्पीकर गिरीश गौतम एवं उनके द्वारा नियुक्त सभापति ही कर रहे हैं। उपाध्यक्ष का पद न होने से इसे मिलनी वाली 1 करोड़ रुपये सालाना स्वेच्छानुदान राशि का भी उपयोग नहीं हो पा रहा है।
दरअसल विधानसभा में उपाध्यक्ष का पद संसदीय सौजन्यता के नाते विपक्ष को देने की शुरुआत भाजपा के तत्कालीन मुख्यमंत्री सुंदरलाल पटवा की सरकार के समय से हुई थी तथा कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक श्रीनिवास तिवारी को उपाध्यक्ष का पद दिया गया था जो 23 मार्च 1990 से 15 दिसम्बर 1992 तक इस पद पर रहे। इसके बाद दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार आई और विधानसभा का उपाध्यक्ष पद भाजपा के विधायक भेरुलाल पाटीदार को दिया गया जो 28 दिसम्बर 1993 से 1 दिसम्बर 1998 तक रहे।
इसके बाद पुन: कांग्रेस की सरकार आने पर भाजपा के ईश्वरदास रोहाणी को विधानसभा उपाध्यक्ष बनाया गया जो 11 फरवरी 1999 से 5 दिसम्बर 2003 तक रहे। इसके बाद भाजपा की उमा भारती के नेतृत्व में सरकार बनी तथा कांग्रेस के हजारी लाल रघुवंशी को उपाध्यक्ष का पद दिया गया जो 18 दिसम्बर 2003 से 11 दिसम्बर 2008 तक रहे। इसके बाद पुन: भाजपा की शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में सरकार बनी और उपाध्यक्ष का पद कांग्रेस के हरवंश सिंह को दिया गया जो 13 जनवरी 2009 से 14 मई 2013 तक रहे। अगली सरकार फिर भाजपा की बनी और कांग्रेस के राजेन्द्र कुमार सिंह को उपाध्यक्ष का पद दिया गया जो 10 जनवरी 2014 से 13 दिसम्बर 2018 तक रहे। लेकिन इसके बाद कांग्रेस की सरकार कमलनाथ के नेतृत्व में आई परन्तु उपाध्यक्ष का पद संसदीय परम्परा के अनुसार विपक्षी दल भाजपा को न देकर स्वयं कांग्रेस ने अपने पास रख लिया और पार्टी की विधायक हिना कांवरे को उपाध्यक्ष बनाया जो 10 जनवरी 2019 से 14 मार्च 2020 तक रहीं। लेकिन पुन: भाजपा की सरकार आने पर उपाध्यक्ष किसी को अब तक नहीं बनाया गया है जिसमें डेढ़ साल गुजर गये हैं।
वैसे एक साल तक भाजपा सरकार ने फुल फ्लेश विधानसभा का अध्यक्ष भी नहीं बनाया था तथा गिरीश गौतम को 22 फरवरी 2021 को यह पद दिया गया जबकि इससे पहले तक भाजपा सरकार ने दो प्रोटेम स्पीकरों जगदीश देवड़ा (24 मार्च 2020 से 2 जुलाई 2020 तक) एवं रामेश्वर शर्मा (2 जुलाई 2020 से 22 फरवरी 2021 तक) से विपधानसभा का काम चलाया। चूंकि उपाध्यक्ष का पद भी स्पीकर के पद की तरह संवैधानिक होता है, इसलिये इसे भाजपा सरकार इसे विपक्ष को नहीं देना चाहती है।