भारतीय क्रिकेट टीम ने पाकिस्तान के खिलाफ टी-20 वर्ल्डकप में हार का सामना किया है, यह पहली बार किसी वर्ल्डकप टूनामेंट में मिली हार है। इस हार से भारतीय प्रशंसक सदमे में हैं। हर जगह टीम की हार की वजहों को गिनाया जा रहा है। मगर पाकिस्तान की टीम ने जिस तरह यह मैच जीता है, उसकी मेहनत को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। पाकिस्तान की हालत पहले ही बहुत खस्ता है, ऐसे में क्रिकेट के लिये बहुत सारे मौके व संसाधन मिलना मुश्किल ही हैं, फिर भी पाक खिलाड़ियों ने बहुत बेहतर तरीके से एक ताकतवर टीम इंडिया का सामना किया और खेल के हर विभाग में खुद को बेहतर साबित भी किया। दरअसल भारत और पाक के बीच क्रिकेट का मैच हो या हॉकी का अपेक्षाओं का पहाड़ खड़ा कर दिया जाता है। प्रशंसक दीवानगी की हद तक भारत को जीतता देखना चाहते हैं। यही स्थिति पाकिस्तान में होती है। नजीजा यह होता है कि जब मैच का परिणाम जिस टीम के खिलाफ जाता है, वह लोगों के निशाने पर आ जाती है। आज यही स्थिति भारत की है।
लेकिन भारतीय टीम हार को भी सहज रूप से ही लिया जाना चाहिये। क्योंकि भारतीय टीम का क्रिकेट सफर अभी बहुत दूर तक चलना है, लिहाजा यदि कोई हार हिस्से में आती है तो उसका मलाल पालने की बजाए उससे सबक लेकर आगे बढ़ना ही श्रेयस्कर है। प्रशंसकों को भी चाहिये कि वह टीम को इतना प्रताडित न करें कि खिलाड़ियों का मनोबल टूटने लगे। दरअसल खेल शारीरिक मजबूती के साथ ही भरपूर मानसिक मजबूती भी मांगता है। यह जो कल्पना ही की जा सकती है कि जब देशवासी मायूस हैं तो हमारी क्रिकेट टीम कितनी परेशान होगी। यूं तो खाड़ी देशों में क्रिकेट खेलना भी टीमों को लिये अलग तरह का अनुभव होता है। पाकिस्तान की टीम को इसलिये फायदा मिला क्योंकि बीते करीब पांच वर्ष से वह दुबई या शारजाह में ही क्रिकेट खेल रही है। जहां तक भारतीय टीम की बात है तो वह भी अक्सर वहां खेलती रही है लेकिन यह बात भी बहुत पहले से साफ होने लगी थी कि भारतीय गेंदबाजी का दस्ता कही न कहीं थोड़ा कमजोर सिध्द हो सकता है, यही मैच में हुआ भी भारत का कोई भी बल्लेबाज पाकिस्तान की ओपनर जोड़ी को कभी भी दबाव में नहीं ले पाया तथा दस विकेट से शर्मनाक हार भारत के खाते में आ गई।
संभव है कि जल्द यह सुधार भी हो। अब बात उसकी होना चाहिये जो इस खेल मे सबसे बड़ी चीज रही। वह यह कि, दोनों ही टीमों ने भरसक संयम का परिचय दिया और मैदान के बाहर खड़े हुए अपेक्षाओं के पहाड़ को खुद पर हावी नहीं होने दिया मैदान पर खेल का तनाव तो था लेकिन वह तनाव नहीं दिखा जो खिलाड़ियों को एक-दूसरे से बहुत दूर कर देता है। फिर मैच के बाद का सबसे उजला पक्ष यही है कि भारतीय कप्तान विराट कोहली के पास जाकर पाकिस्तान के नाबाद सलामी बल्लेबाज रिजवान और बाबर ने जाकर बात की। रिजवान तो कोहली के गले भी मिले और कोहली ने भी मुस्कुरा कर उन्हें गले लगाया व पीठ थपथपाई। दरअसल रिजवान खुद कोहली के बड़े फैन हैं। इस खिलाड़ी भावना ने हार के मलाल से परे जाकर एक नयी तस्वीर रच दी। यही सच्ची खेल भावना है, जिसका प्रदर्शन पाकिस्तान के साथ भारत ने भी किया। खुद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने दोनों खिलाड़ियों की तस्वीर शेयर कर इसे स्पिरिट ऑफ क्रिकेट की संज्ञा दी। यही असली क्रिकेट है और यही हर खेल में होना चाहिये। जीतने के लिये संघर्ष के तनाव में आपसी समन्वय को ध्वस्त नहीं करना ही नहीं बल्कि जीवन का मूलमंत्र है। यद्यपि कुछ वर्ग ऐसे हैं जो भारत और पाकिस्तान के मुकाबलों में कुछ दूसरे और अनचाहे रंग भरने की कोशिश करते हैं। कल मैच के बाद की घटना उनके इस आचार व्यवहार को खारिज करती है।
आशीष दुबे