भोपाल। प्रदेश की कृषि उपज मंडियों में भृत्य और दैनिक वेतन भोगी से सहायक उपनिरीक्षक बने मंडी कर्मियों के मामलों का अब परीक्षण होगा। सभी मंडी सचिवों से इसकी जानकारी 28 अक्टूबर तक देने भेजे जाने के राज्य मंडी बोर्ड के एमडी विकास नरवाल ने निर्देश जारी किये हैं। उल्लेखनीय है कि राज्य शासन ने 30 मई 1997 को राज्य मंडी बोर्ड सेवा का गठन किया था।

इस सेवा में राज्य विपणन सेवा, बोर्ड सेवा के सदस्य और मंडी समिति के नाकेदार (अब सहायक उपनिरीक्षक) को सम्मिलित किया गया था और इन्हें राज्य मंडी बोर्ड सेवा का कर्मचारी घोषित किया गया था। 30 मई 1997 के बाद कई मंडी समितियों ने अपने भृत्यों को नाकेदार (अब सहायक उपनिरीक्षक) सवंर्ग के पद पर पदोन्नति दे दी गई तथा नाकेदार के पद पर कार्यरत अनेक दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों को भी सहायक उप निरीक्षक के पद पर नियमित कर दिया गया ताकि ये राज्य मंडी बोर्ड सेवा के सदस्य बन जायें और इन्हें इसके अनुरुप लाभ मिल सकें और अन्य मंडियों में तबादले हो सकें।

इसीलिये अब इन मामलों की जानकारी सभी मंडी समितियों से मांग ली गई है ताकि इनका परीक्षण हो सके। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार मंडी समितियों के सभी कर्मचारियों को राज्य मंडी बोर्ड सेवा के दायरे में लाना चाहती है जिस पर मंडी बोर्ड मुख्यालय कार्य कर रहा है। वर्तमान में राज्य मंडी बोर्ड सेवा के अंतर्गत 2 हजार 709 सहायक उप निरीक्षक कार्यरत हैं जबकि मंडी समितियों में 1 हजार 897 भृत्य/चौकीदार/स्वीपर कार्यरत हैं।