लंबी पैरोल वाले कैदियों ने जेल में कमाई रकम अय्याशी में उड़ाई...

भोपाल: कोरोना काल में कैदियों को लंबे समय तक पैरोल पर छोड़ने के दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं। जेल से बाहर रहने पर कैदियों ने जुआ, सट्टा और नशे के लिए जेल नियमों को धता बताते हुए अपने बैंक खाते खाली कर दिए हैं।

कैसे निकाले रुपए:

लंबी पैरोल मिलने के कारण बंदियों को रुपये की जरूरत पड़ी। बताया जाता है कि इस दौरान किसी कियोस्क संचालक ने ऐप के माध्यम से रुपये निकालने का हुनर बता दिया। इसके बाद बंदियों ने आधार कार्ड, बायोमेट्रिक तकनीक से अंगूठा लगाकर जेल नियम के विरुद्ध अपने खाते खाली कर दिए।

मामला संज्ञान में आने पर जेल प्रबंधन ने ऐसे बंदियों को एक साल तक पैरोल नहीं देने का फैसला किया है।

सेंट्रल जेल, भोपाल से मिली जानकारी के मुताबिक पिछले दिनों न्यायालय ने एक बंदी को जुर्माना की राशि के 10 हजार रुपये जमा करने का आदेश दिया था। तब पता चला कि उस बंदी के खाते से रुपये निकाल लिए गए हैं। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि उसने पैरोल के दौरान अपने खाते से रुपये निकालकर खर्च कर दिए हैं। इसके बाद अन्य बंदियों के खातों की जांच की गई। पता चला कि करीब 40 कैदी अपने खाते खाली कर चुके हैं।

पीडी अकाउंट में जमा राशि सुरक्षित:

जेल में श्रम करने पर कैदी को मिलने वाले पारिश्रमिक की कुल राशि में से आधी राशि कैदी के कारण पीड़ित पक्ष को देने के लिए पीडी अकाउंट में जमा होती है। यह खाता न्यायालय की देखरेख में रहता है। यह राशि सुरक्षित है।

क्या है नियम:

सजा काट रहे बंदी को काम के बदले मिलने वाली राशि उसके खाते में जमा की जाती है। इस राशि में से एक तिहाई राशि से वह जेल की कैंटीन से जरूरत का सामान खरीद सकता है। शेष में से आधी राशि विधिक सहायता के लिए खर्च कर सकते हैं। शेष बचे रुपये उन्हें रिहाई के समय निकालने का अधिकार है। कैदी को अपने खाते से रुपये निकालने के लिए विड्राल फार्म भरना होता है। इसमें बंदी के अलावा जेल अधीक्षक के भी हस्ताक्षर होते हैं। इसके बाद बैंक से रुपये निकलते है राशि का आहरण बैंक द्वारा पासबुक में दर्ज किया जाता है।