1. सर्वांगासन: यह आसन पूरे शरीर यानी पैरों की उंगलियों से लेकर मस्तिष्क तक को फायदा पहुंचाता है। इसलिए इसे सर्वांगासन कहते हैं। इसे नियमित रूप से करना स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है।

करने का तरीका: पीठ के बल लेट जाइए। शरीर सीधा लेकिन ढीला रखिए और हाथों के तलवे जमीन पर रखिए। अब दोनों पैरों को एक साथ ऊपर उठाइए। 90 डिग्री तक पहुंचने के बाद हाथों को जमीन पर रखकर कमर भी ऊपर उठाइए और हाथों को कोहनियों से मोड़कर कमर को सहारा दीजिए। 

अंतिम स्थिति में पहुंचने पर आंखें बंद कीजिए या पैरों के अंगूठे की ओर देखिए। शुरू में 15-20 सेकंड तक इस आसन में स्थिर रहिए। बाद में अभ्यास से एक मिनिट तक यह आसन कर सकते हैं। आसन से वापिस आने के लिए पैरों को पहले सिर की ओर लाकर हाथ जमीन पर रखिए। 

धीरे-धीरे कमर, फिर नितम्ब जमीन पर रखने के बाद पैर जमीन पर रखिए। इस आसन में शरीर का पूरा भार कंधों पर रहता है और सेंटर ऑफ ग्रेविटी पैरों से नीचे आकर कंधों पर आती है, इसलिए हाथों का सहारा भी जरूरी नहीं होता।

» इससे मस्तिष्क क्षेत्र में रक्त की सही आपूर्ति होती है। 

» आपकी पाचन शक्ति अच्छी होती और याददाश्त बढ़ती है। यह आसन कब्ज से छुटकारा भी दिलाता है।

» वजन को नियंत्रित करता है।

» यौन समस्याओं और विकारों में यह बहुत लाभदायक है। 

» थायराइड और पैराथाइरॉइड जैसी ग्रंथियों को उचित रूप में पोषक तत्व एवं रक्त मिल पाता है। जो थायराइड समस्याओं को हल करने के लिए मददगार है। 

» यह पैरों की रक्त वाहिकाओं में रक्त का दबाव कम कर देता है। जो हैं, उनके लिए यह आसन वरदान साबित हो सकता है।

सावधानीः जिनको कमर का दर्द हो, स्लिप डिस्क, सर्वाइकल की समस्या हो, चक्कर आते हों, गर्दन में दर्द हो या जो दिल के मरीज हों वे इस आसन को न करें। इसके अलावा इस आसन को करते समय सिर को ऊपर न उठाएं।

2. मत्स्यासन:

करने का तरीका: सबसे पहले पद्मासन में बैठिए और पीठ के बल लेट जाइए। इसके बाद दोनों हथेलियों को सिर के बाजू में रखकर उसके सहारे सिर और धड़ ऊपर उठाइए। अब सिर का ऊपर का हिस्सा जमने पर टिकाकर हाथों की तर्जनियों से पैरों के अंगूठे पकड़ लीजिए। कोहनियां जमीन पर रखिए। पूरा शरीर ढीला रखिए और धीरे-धीरे श्वसन पेट से होने दीजिए।

शुरू में 10 से 20 सेकंड तक यह आसन करने के बाद आधा या एक मिनिट तक भी इसे कर सकते हैं। आसन छोड़ने के लिए पहले पैरों के अंगूठे छोड़कर पीठ सीधी करके जमीन पर रखें और उठकर बैठने के बाद पद्मासन से सामान्य स्थिति में आ जाएं। बहुत से साधक यह आसन पानी में तैरते समय 5 से 10 मिनट तक करते हैं।

 

इसके फायदे:

» यह आसन श्वसन प्रणाली को मजबूत करता है और दमा, खांसी व पुरानी गले की समस्याओं में लाभदायक है।

» गुर्दे की कार्यक्षमता बढ़ाता है और ग्रीवा ग्रन्थि को काफी हद तक सक्रिय करता है।

» इससे आंखों की रोशनी भी बढ़ती है।

» अस्थमा के रोगियों को इससे लाभ मिलता है। पेट की चर्बी भी घट जाती है।

» थाइरॉयड और मधुमेह में भी यह आसन फायदेमंद है। 

» पैराथाइरॉइड, पीनियल व पिट्यूटरी ग्लैंड को परिपोषित करता है।

सावधानी: शल्य चिकित्सा के बाद यह आसन नहीं करें। साथ ही उच्च रक्तचाप या चक्कर आते हों तो इस आसन को करने से बचें। यदि पद्मासन नहीं लगा सकते तो अर्ध पद्मासन या सिर्फ साधारण पालथी लगाकर भी यह आसन कर सकते हैं।

3. ध्यान: आराम से किसी भी सुखासन में बैठ जाएं। यदि जरूरत हो तो तकिए का उपयोग भी कर सकते हैं। अब अपनी आंखें बंद कर लें। स्वाभाविक तरीके से सांस लें और छोड़ें। इस दौरान सांसों को नियंत्रित करने की कोशिश न करें।

सांस पर अपना ध्यान केंद्रित करें और सांस अंदर लेने और बाहर निकालने पर शरीर की गतिविधियों पर गौर करने के साथ-साथ अपनी छाती, कंधों, पसलियों और पेट का भी निरीक्षण करें। अपनी सांस पर ध्यान केंद्रित करें। यदि आपका मन भटकता है तो दोबारा सांसों पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करें।

» ध्यान करने से मनुष्य की चेतना का विकास होता है। 

» एकाग्रता में सुधार करने के लिए आपको नियमित रूप से ध्यान करना चाहिए। इससे भूलने की समस्या और डिमेंशिया से छुटकारा मिलता है। 

» तनाव को कम करने में बहुत मदद मिलती है। जीवन के प्रति दृष्टिकोण भी सकारात्मक होता है।

इसके फायदे:

» एकाग्रता बढ़ाने में मदद मिलती है। मानसिक अनुशासन बढ़ता है। बच्चों का पढ़ाई में फोकस बढ़ता है।

» अनिद्रा दूर होती है। ध्यान के द्वारा किसी भी प्रकार के शारीरिक दर्द को कम किया जा सकता है।

सावधानी: ध्यान को किसी भी समय किया जा सकता है। हालांकि, सुबह जल्दी या देर रात का समय ध्यान करने के लिए उत्तम होता है। इसके अलावा रोजाना एक ही समय और स्थान पर ध्यान करना सर्वोत्तम होता है।