मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि, हमारे इस विचारधारा में ना कभी हिंदू धर्म को खतरा हुआ है ना कभी होगा क्योंकि हमारा हिंदू धर्म इतना व्यापक इतना विशाल है इसमें सब को स्वीकार किया है. ईसाई धर्म पश्चिम में बाद में गया पहले यहां हिंदुस्तान में आया ईसा मसीह के 40 साल बाद ईसाई धर्म देश में आ गया था लेकिन हिंदू धर्म को कोई खतरा नहीं हुआ. इस्लाम आठवीं सदी में आ गया था फिर भी हिंदू धर्म को कोई खतरा नहीं हुआ. मुगलों और मुसलमानों का कई सालों तक राज रहा लेकिन हिंदू धर्म को कोई खतरा नहीं हुआ. आज जब राष्ट्रपति से लेकर नीचे तक सभी हिंदू पद पर हैं तो फिर हिंदू धर्म को खतरा कैसे हो गया, मैं नहीं समझ पा रहा हूं. यह खतरा बताया जाता है ताकि वे अपनी फासीवादी विचारधारा को आगे ले जा सके और अपनी राजनीतिक रोटियां सीख सकें और राजनीतिक पद पर जाकर पैसा कमा सकें. संघ से आप कैसे लड़ेंगे क्योंकि संघ तो कोई रजिस्टर्ड संस्था है ही नहीं इसका कोई अकाउंट ही नहीं है यदि संघ का कोई कार्यकर्ता आपराधिक वृत्ति में पकड़ा जाता है तो कहते हैं हमारा कोई सदस्य ही नहीं जब उनका संगठन ही रजिस्टर्ड नहीं है सदस्यता ही नहीं है तो उनके सदस्य बताएंगे कैसे.
दिग्विजय सिंह ने कहा नाथूराम गोडसे उस विचारधारा में रहे बात यही है कि आप ऐसे संगठन से लड़ रहे हैं जो ऊपर से नहीं दिखता लेकिन नीचे जिस तरह से दीमक लड़ती है किसी घर में संघ बिल्कुल उसी तरह से काम करता है. मैं आज सबसे ज्यादा गाली खाऊंगा क्योंकि आर एस एस की तुलना मैंने दीमक के साथ कर दी यह विचारधारा की बात है. आर एस एस के लोग मुझसे बात करें, तुम्हारा संगठन कहां है तुम्हारा अस्तित्व कहां है और रजिस्टर्ड संस्था कहां है यह केवल गुपचुप तरीके से काम करते हैं हर चीज छुपे छुपे करते हैं खुलेआम कोई काम नहीं करते. मैं पूछना चाहता हूं की क्या आरएसएस ने कभी संगठन के रूप में धरना दिया है कोई आंदोलन किया है कहीं किसी आम जनता मजदूर या किसान की लड़ाई लड़ी है.