कांग्रेस विधायक डॉ. गोविंद सिंह ने राज्य में खाद्य संकट का मुद्दा उठाकर ध्यान खींचा. उन्होंने कहा कि समय पर खाद नहीं मिलने से प्रदेश के किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. खाद की कमी के कारण किसानों को सड़क पर आना पड़ा और पुलिस लाठी का सामना करना पड़ा. अपने जवाब में कृषि मंत्री कमल पटेल ने कहा कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है. व्यवस्था के तहत सरकार ने 70 प्रतिशत खाद सोसायटियों को और 30 प्रतिशत निजी दुकानदारों को उपलब्ध करायी. उन्होंने खाद की कमी के आरोपों का जोरदार खंडन किया। इसके बाद विपक्ष ने मंत्री के जवाब से असंतुष्ट होकर सदन से बहिर्गमन किया।

कांग्रेस विधायक डॉक्टर गोविंद सिंह ने ध्यानाकर्षण में उठाया था खाद की कमी का मुद्दा

कांग्रेस विधायक ने कहा कि खाद की कमी की वजह से कई स्थानों पर बोनी नहीं हो सकी

कृषि मंत्री बोले पिछली बार से ज्यादा इस साल बोनी हुई है

मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने किया हंगामा

कांग्रेस विधायक सतीश सिकरवार ने आरोप लगाया कि जांच में 1057 अमानक खाद के नमूने पाए गए

मंत्री ने कहा इस मामले में कार्रवाई की गई। FIR की गई। मंत्री बोले इस बार  POS मशीन से खाद का वितरण कराया गया, इसलिए लाइन लग रही है। पहले कालाबाजारी हो जाती थी

ध्यानाकर्षण सूचना क्र. 26.749

प्रेषक :

नियम 138 (1) के अधीन मंत्री के ध्यान आकर्षण की सूचना

(सदस्य)

डॉ. गोविन्द सिंह, डॉ. सतीश सिकरवार, श्री आरिफ अक़ील

अध्यक्ष महोदय,

मेरी ध्यान आकर्षण सूचना का विषय इस प्रकार है:

प्रदेश के ग्वालियर-चम्बल सहित समूचे प्रदेश में खाद माफिया द्वारा खाद की कालाबाजारी व्यापक पैमाने पर की जाकर खाद का कृत्रिम संकट उत्पन्न किया जा रहा है, जिसके कारण गेंहू, चना एवं सरसों आदि रबी फसलों की बोवनी किसान समय पर नहीं कर पाए है। यूरिया एवं डीएपी खाद की अनुपलब्धता के चलते एक-एक बोरी खाद के लिए किसान परेशान है। किसान खेत में पलेवा लगाकर बोनी करने के लिए खाद की तलाश में भटकने को मजबूर है। सहकारी संस्थाओं/ खाद बिक्री केन्द्रों की लाइन में दिन भर खड़े रहने के बावजूद किसानों को खाली हाथ घर लौटना पड़ रहा है जिससे मजबूर होकर उन्हें 1205 रूपये डीएपी की बोरी व्यापारियों से 1400 रूपये में खरीदना पड़ रहा है। कालाबाजारियों एवं बिचौलियों द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में एक बोरी खाद 1500 से 1800 रू. में बेची रही है। सहकारी समितियों के अधिकारी कर्मचारियों द्वारा खाद वितरण में भेदभाव किया जा रहा है जिससे बड़े एवं प्रभावशाली किसानों को पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध कराई जा रही है एवं छोटे एवं सीमांत किसानों स्टॉक में खाद नहीं होने का बहाना कर भगा दिया जाता है। भिण्ड, मुरेना, सागर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, शाजापुर में खाद वितरण केन्द्रों पर किसानों की लम्बी-लम्बी कतारें लगी है किंतु मांग के अनुसार खाद की आपूर्ति न होने से किसानों द्वारा कई दिनों से प्रदर्शन एवं चक्का जाम किया जा रहा है जिससे तनावपूर्ण स्थिति निर्मित होने से पुलिस को बल प्रयोग भी करना पड़ा है। उज्जैन में किसानों द्वारा पूरिया खाद की कमी को लेकर लाठियां बरसाई गई। निजी खाद विक्रेताओं द्वारा ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच में किसानों को मिट्टी और राख से निर्मित नकली (अमानक) खाद बेची जाकर किसानों के साथ धोखाधड़ी की जा रही है। कृषि विभाग द्वारा विगत 06 माह में खाद के 17 हजार नमूने लिए गए जिसमें से 1055 नमूने अमाने अमानक मिले। इन अमानक नमूनों में से सबसे अधिक सहकारी समितियों के पाए गए किंतु इसके बाद भी प्रदेश में नकली एवं अमानक स्तर के खाद की बिक्री धड़ल्ले से की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा भारत सरकार को समय पर अनुमानित खाद की डिमांड नहीं भेजी गई, जिसके परिणाम स्वरूप पर्याप्त मात्रा में भारत सरकार से खाद नहीं मिलने से प्रदेश में खाद संकट गहरा गया जो कि राज्य सरकार की अदूरदर्शिता, अक्षमता एवं असफलता को उजागर करता है। खाद की कालाबाजारी एवं नकली एवं अमानक स्तर का खाद बेचे जाने को लेकर प्रदेश के किसानों में तीव्र रोष व्याप्त है।

विधानसभा ध्यानाकर्षण-3

भोपाल: 22 दिसम्बर, 2021

किसान कल्याण तथा कृषि विकास मंत्री श्री कमल पटेल का वक्तव्य

प्रदेश के ग्वालियर चम्बल सहित प्रदेश में पर्याप्त उर्वरकों का भण्डारण कराया गया है। प्रदेश में दिनांक 20 दिसम्बर, 2021 तक 30.27 लाख मे. टन उर्वरकों (यूरिया 13.44 लाख मे.टन, डीएपी 5.80 लाख मे.टन, एनपीके 3.54 लाख मे.टन तथा एसएसपी 7.49 लाख मे. टन) का भण्डारण कराया गया है, जिसमें से 25.11 लाख मे. टन उर्वरकों (यूरिया 11.30 लाख मे.टन, डीएपी 5.12 लाख मे.टन, एनपीके 2.99 लाख मे. टन तथा एसएसपी 5.70 लाख मे. टन) का विक्रय किसानों को किया गया है। प्रदेश में 5.16 लाख मे.टन उर्वरक (यूरिया 2.14 लाख मे.टन, डीएपी 0.68 लाख मे. टन, एनपीके 0.55 लाख मे. टन तथा एसएसपी 1.79 लाख मे.टन) शेष उपलब्ध है। यूरिया एवं डीएपी की निरंतर उपलब्धता जारी है। किसानों द्वारा फसलों की बोनी समयानुसार की गई है। विगत वर्ष दिनांक 17 दिसंबर 2020 तक गेहूं, चना एवं सरसों आदि रबी फसलों की बोनी 121.18 लाख हेक्टेयर में की गई थी, इस वर्ष दिनांक 17 दिसंबर 2021 तक 123.21 लाख हेक्टेयर में गेहूं, चना एवं सरसों आदि रबी फसलों की बोनी की गई है। इस हेतु किसानों को मांग अनुसार यूरिया एवं डीएपी आदि उर्वरक उपलब्ध कराया गया है, जिससे रबी फसलों का उत्पादन विगत वर्ष से अधिक होने का अनुमान है। किसानों को उर्वरकों का विक्रय पीओएस मशीन के व्दारा अनिवार्य किये जाने तथा व्यवस्था की दृष्टि से भी लाईन लगवाकर किसानों को उर्वरक वितरण किया गया है। प्रदेश के कतिपय स्थानों पर अधिक मूल्य पर उर्वरक विक्रय की जानकारी प्रकाश में आने पर 25 व्यक्तियों/फर्मों के विरूद्ध पुलिस प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस प्रकार विभाग द्वारा सतत् निगरानी रखते हुए कालाबाजारियों पर कठोर कार्यवाहियाँ की गई हैं। सहकारी समितियों के अधिकारी/कर्मचारी द्वारा उर्वरक वितरण में कोई भेदभाव किये जाने की जानकारी प्रकाश में नहीं आई है। भिण्ड, मुरैना, सागर, अशोकनगर, शिवपुरी, शाजापुर में उर्वरक विक्रय केन्द्रों पर पीओएस मशीन के व्दारा तथा व्यवस्था की दृष्टि से लाईन लगवाकर उर्वरकों का वितरण करवाया गया है। उक्त जिलों में कई दिनों से प्रदर्शन एवं चक्का जाम किये जाने की स्थिति नहीं पाई गई है। अपितु गुना जिले में तत्समय वर्षा होने से विपणन संघ गुना के नानाखेड़ी भण्डारण केन्द्र पर दिनांक 25 अक्टूबर 2021 को किसानों की संख्या अधिक होने तथा किसानों व्दारा उर्वरक की मांग अधिक करने से मुख्य मार्ग पर कुछ किसानों द्वारा चक्का जाम किया गया। स्थानीय अधिकारियों द्वारा • किसानों को समझाइश देकर कृषि विभाग एवं राजस्व अधिकारियों की उपस्थिति में कृषकों को उर्वरक वितरण कराया गया। उज्जैन जिले में विपणन संघ तराना में पीओएस मशीन में तकनीकी खराबी के चलते यूरिया वितरण समय पर प्रारंभ नहीं हो सका, जिसके फलस्वरूप कृषक बड़ी संख्या में एकत्रित थे तभी विपणन संघ के गोदाम में कुछ अनाधिकृत लोग घुस गये साथ ही कुछ लोग यूरिया से भरे ट्रक एवं गोदाम में से यूरिया अधिकृत आदेश के बिना उठाकर ले जा रहे थे। मौके पर थाना प्रभारी तराना व्दारा पुलिस को भेजकर अनाधिकृत रूप से ले जाई जा रही यूरिया खाद की बोरियों को छुड़वाकर वापस रखवाई गईं। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) तराना व्दारा मौके पर पहुंचकर जनप्रतिनिधिगणों की उपस्थिति में टोकन बांटकर यूरिया वितरण कराया गया। यह कहना सही नहीं है कि निजी उर्वरक विक्रेताओं व्दारा ज्यादा मुनाफा कमाने के लालच में किसानों को मिटटी और राख से निर्मित नकली (अमानक) खाद बेची जाकर किसानों के साथ धोखाधड़ी की जा रही है। वास्तविकता यह है कि इस वर्ष पूरे प्रदेश में सहकारी एवं निजी क्षेत्रों से 12,750 नमूने लिये गये हैं, जिनमें से 1246 नमूने विश्लेषण उपरांत अमानक पाये गये हैं। जिनका तत्काल विक्रय प्रतिबंधित किया गया है, इसके साथ ही 99 उर्वरक विक्रेताओं के विक्रय प्राधिकार पत्र निलंबित तथा 7 उर्वरक विक्रेताओं के विक्रय प्राधिकार पत्र निरस्त किये गये हैं एवं कालाबाजारी तथा अमानक उर्वरक आदि प्रकरणों में 78 एफ आई आर दर्ज कराई गई हैं। विक्रेताओं के संस्थानों, भण्डारण केन्द्रों का निरीक्षण किया जा रहा है तथा आवश्यकता अनुसार परीक्षण हेतु नमूने लिये जाकर अमानक अवैध भण्डारण, अवैध परिवहन तथा कालाबाजारी आदि जैसे प्रकरणों पर निरंतर निगरानी रखी जाकर कठोर कार्यवाहियाँ की जा रही हैं। अत: यह कथन सही नहीं है कि प्रदेश में नकली एवं अमानक स्तर के उर्वरकों की बिक्री की जा रही है। रबी 2021-22 हेतु उर्वरकों की मांग भारत सरकार द्वारा आयोजित जोनल काँफ्रेंस दिनांक 27 अगस्त, 2021 के पूर्व ही उपलब्ध करा दी गई थी। अतः यह कहना सही नहीं है कि भारत सरकार को समय पर उर्वरकों की मांग नहीं भेजे जाने से प्रदेश में उर्वरक संकट गहरा गया। प्रदेश में यूरिया, डीएपी सहित अन्य उर्वरकों का उपलब्धता अनुसार भण्डारण कराया गया है तथा उर्वरकों की आपूर्ति निरंतर कराई जा रही है। इस प्रकार प्रदेश के किसानों में तीव्र रोष व आक्रोश व्याप्त होने जैसी स्थिति नहीं है।