भोपाल. आयुष विभाग हर साल लगभग 40 करोड़ रुपए की दवा आयुर्वेदिक दवाइयां लघु वनोपज संघ से खरीदता आ रहा है. यहां तक कि करोना संक्रमण काल में भी 40 से 50 करोड़ की दवाइयां खरीदी गई. अब यही दवाइयां आयुष के ग्वालियर टेस्टिंग लैब से अमानक का प्रमाण पत्र दिया जा रहा है. जबकि लघु वनोपज संघ दवाइयां प्रदाय करने से पहले स्वयं की लेबोरेटरी और आयुष विभाग से अप्रूव्ड लैबोरेट्री क्वालिटी कंट्रोल लेबोरेटरी भोपाल से टेस्टिंग कराता है. इसके बाद भी आयुष विभाग की ग्वालियर लेबोरेटरी से टेस्ट फेल हो जा रहा है. सूत्रों की माने तो आयुष विभाग के अफसर बाजार से दवा खरीदी के लिए ग्राउंड तैयार कर रहे हैं.

आयुष विभाग ने 2021 में विंध्य हर्बल को आयुर्वेदिक दवाइयों की आपूर्ति के लिए 3 करोड़ रुपए का टेंडर दिया था. दो नामचीन लेबोरेटरी से टेस्टिंग होने के बाद लघु वनोपज संघ की विंध्या हर्बल की 28 दवाइयां इस विभाग को प्रदाय की. आयुष विभाग के अफसरों ने पहली बार ग्वालियर टेस्टिंग लैब से क्राश जांच कराई और उसमें से 8 के सैंपल फेल कर दिए गए. सूत्रों ने बताया कि बहुत कम रीडिंग के आधार पर सैंपल फेल किए गए हैं. दरअसल, इसकी आड़ में आयुष की खरीदी शाखा कमीशन के फेर में बाजार से दवाइयां खरीदना शुरू कर दिया है. आयुष विभाग के डॉक्टर ही ग्वालियर टेस्टिंग लैब को अत्याधुनिक नहीं बता रहे हैं. सूत्रों की माने तो ग्वालियर टेस्टिंग लैब और उसके उपकरण बहुत पुराने हैं. टेस्टिंग करने वाले साइंटिस्ट भी प्रशिक्षित नहीं है. ग्वालियर में यह टेस्टिंग 2 साल पहले ही शुरू हुई है.

क्यों निर्मित हुई ऐसी स्थिति
आयुष विभाग और लघु वनोपज संघ के बीच आयुर्वेदिक दवाइयों का कारोबार लंबे समय से चल रहा है. संघ ने इस कार्य के लिए राहुल कोठारी को इंस्टीट्यूशनल एजेंट के रूप में रखा था. इसके लिए संघ द्वारा राहुल कोठारी को टारगेट बेस 20 से 25 पर्सेंट कमीशन दिया जाता रहा है. कोठारी ही आयुष विभाग के अधिकारियों को मैनेज करते रहें. संघ ने जून 2020 को राहुल कोठारी से बाय-बाय कर लिया. कोठारी के जाने के बाद से ही ऐसी स्थिति निर्मित होने लगी. सूत्रों की माने तो संघ के अफसरों द्वारा आयुष विभाग के अधिकारियों मैनेजमेंट नहीं किया जा रहा था जिसकी वजह से विंध्य हर्बल उत्पाद की दवाइयां अमानत पाई जाने लगी.

कैबिनेट के निर्णय को दरकिनार करने का प्रयास
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की कैबिनेट ने लघु वनोपज संघ द्वारा निर्मित विंध्य हर्बल उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए निर्णय लिया था कि आयुष विभाग अपने अस्पतालों के लिए दवाइयां संग से खरीदेगा. जब तक संघ में इंस्टीट्यूशनल एजेंट काम करता रहा, तब तक यही दवाइयां आयुष विभाग को खरी पाई जाती रही. इंस्टीट्यूशनल एजेंट के हटते ही आयुष विभाग ग्वालियर टेस्टिंग ऐप से परीक्षण कराकर अमानक बताया जाने लगा.  आयुष विभाग ने सुनियोजित ढंग से कैबिनेट के निर्णय को दरकिनार करने के लिए नया फार्मूला तैयार किया है.