जल संसाधन विभाग के रतलाम उपसंभाग में पदस्थ तत्कालीन एसडीओ सीएस चरावन्डे का वर्ष अप्रैल, 2012 में स्थानांतरण हो जाने के बावजूद, जल संसाधन कालोनी रतलाम में आवंटित शासकीय आवास क्रमांक एफ-2 रिक्त नहीं किया गया जिस पर प्रमुख अभियंता जल संसाधन ने 2 फरवरी 2013 को उसे  

निलंबित कर दिया गया तथा 11 मार्च 2013 को आरोप पत्र जारी किये गये। लेकिन अब यह प्रकरण बिना कार्यवाही के समाप्त कर दिया गया है।

चरावन्डे द्वारा आरोप पत्र के संबंध में दिया उत्तर समाधानकारक नहीं पाये जाने के कारण प्रमुख अभियंता ने 19 अगस्त 2013 को आदेश जारी कर उसकी एक वार्षिक वेतनवृद्धि असंचयी प्रभाव से रोक दी। चरावन्डे ने इस पर 1 अक्टूबर 2013 को शासन के समक्ष अपील प्रस्तुत की गई। तत्कालीन प्रमुख सचिव, जल संसाधन ने सुनवाई उपरान्त 24 अप्रैल 2015 को चरावन्डे की दो वार्षिक वेतनवृद्धि संचयी प्राभाव से रोके जाने का दण्ड दे दिया। लोक सेवा आयोग ने भी इस दण्ड पर अपनी सहमति दे दी।

एक बार फिर चरावन्डे ने दो वेतन वृद्धि रोकने के आदेश के विरुध्द पुनर्विलोकन अपील प्रस्तुत की। इस अपील पर प्रमुख अभियंता जल संसाधन से अभिमत प्राप्त किया गया। इस बार प्रमुख अभियंता द्वारा अभिमत दिया गया कि चरावन्डे द्वारा उनका स्थानांतरण हो जाने के उपरांत भी शासकीय आवास उनकी पारिवारिक परिस्थिति जैसे बच्चों की शिक्षा एवं पारिवारिक सदस्यों के स्वास्थ्य कारणों से रिक्त नहीं किया गया जो मानवीय आधार पर उचित एवं मान्य है। नियम के अनुसार स्थानांतरण उपरांत शासकीय आवास रिक्त नहीं करने पर बाजार दर से किराये का निर्धारण कर किराया वसूल करने का अधिकार सुरक्षित है, जिसके तहत कार्यपालन यंत्री, जल संसाधन संभाग, रतलाम द्वारा चरावन्डे पर दाण्डिक किराया रूपये 40 हजार 485 अधिरोपित कर वसूल किया गया। दो वार्षिक वेतनवृद्धि रोके जाने का दण्ड अत्यधिक कठोर प्रतीत होती है, जो न्याय सिद्धांतों के प्रतिकूल प्रतीत होता है।

इस पर चरावन्डे दो वेतनवृध्दि रोकने के दण्डादेश को निरस्त करते हुये उन्हें दोषमुक्त किये जाने का प्रशासकीय निर्णय लिया गया जिस पर लोक सेवा आयोग ने भी सहमति दे दी और अब प्रकरण समाप्त कर दिया गया है।

निलम्बित अनुरेखक का प्रकरण भी खत्म किया 

इसी प्रकार, कार्यालय कार्यपालन यंत्री ग्रामीण यांत्रिकी सेवा सम्भाग खण्डवा में पदस्थ अनुरेखक बालकराम पटेल पर जवहार रोजगार के अन्तर्गत खाद्यान वितरण में अनियमिता करने का आरोप लगा जिस पर खण्डवा कलेक्टर ने 13 अप्रैल 1998 को उसे निलंबित कर दिया था। बाद में 24 जुलाई 2007 को पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने उसे बहाल कर दिया तथा आदेशित किया कि निलम्बन अवधि का नियमितिकरण न्यायालय का अन्तिम आदेश पारित होने के बाद किया जावेगा। न्यायालय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश खण्डवा द्वारा पारित निर्णय 20 नवम्बर 2020 में बालकराम पटेल को आरोपों से दोषमुक्त किया कर गया। इस पर जल संसाधन विभाग के ईएनसी ने अब उक्त अनुरेखक की निलम्बन अवधि 13 अप्रैल 1998 से 24 जुलाई 2007 का नियमितिकरण किये जाने का प्रशासकीय निर्णय लिया गया है।